रविवार, मार्च 28, 2010

jaago india ab to jaago
क्यों भई क्या हुआ "जागो इंडिया जागो" का स्लोगन याद आ गया ! आना ही चाहिए अब ये स्लोगन इतनी बार टीवी पर दिखाया जाता है की अब तो ये बच्चे बच्चे की जुबां पर चढ़ चुका है ! अब आप ये सोच रहे होंगे की मैं आपको ये स्लोगन क्यों याद दिला रही हूँ ! अरे भई बेचारे ये चाय ( TATA TEA) बेचने वाले अपनी चाय के साथ कितना कीमती स्लोगन बेच कर रहे है और एक हम है की मजाल हो इनकी सुने और सुने भी क्यों अब ये बेचने वाले तो ना जाने क्या क्या बेचते रहते है किस किस की सुनेंगे ???(पिछले दिनों खबर पड़ी की कोई फेसबुक पर भूत बेच रहा है, सोचा की चलो खरीद लू पर मम्मी की डांट का डर भूत के डर से ज्यादा था इसलिए नहीं खरीदे) लेकिन कभी कभी हमे इन बेचने वालो की सुन भी लेनी चाहिए आखिर ये यूही तो गला फाड़ नहीं रहे !
चलिए अब थोड़ी आसान भाषा मैं समझाती हूँ की आखिर मैं कहना क्या चाहती हूँ !
आज हम सभी सिस्टम को अनेको अनेक गालिया देते है और कारण सिस्टम में मौजूद "भ्रष्टाचार" जिसकी वजह से आज लगभग सभी ने सिस्टम को गालिया देने के मामले में पीएचडी की हुई है ! लेकिन यहाँ मेरा एक सवाल है की आखिर इस सिस्टम को ऐसा बनाया किसने ???
आज़ादी के बाद हमे जो देश मिला क्या वो ऐसा ही था ??? क्या हमारे देश का सिस्टम आज़ादी के काल से ही ऐसा है ??? जवाब होगा नहीं ! हमारा देश तो "सोने की चिड़िया" कहलाया करता था जिसके ज़र्रे ज़र्रे में खुशिया थी उस वक़्त देश का खजाना भरा हुआ था ! लेकिन धीरे धीरे हमारा खजाना खाली होता गया ये या तो लूट लिया गया या फिर कई नासमझ सत्ताधारियो की वजह से बदहाली की भेट चढ़ गया, और आज इसका आलम ये है की हमे किसी भी तरह के आयोजन के लिए भी रिजर्व बैंक से मिलने वाले क़र्ज़ का मुँह तांकना पड़ता है ! आखिर क्या वजह है इसकी की जब भी कोई सरकार सत्ता में आती है तो वो सबसे पहले यही कहती है की सरकारी खजाना खाली है और वो कुछ नहीं कर सकती इसलिए उसे तरह तरह के टैक्स वसूलने पद रहे जिससे की वो भारत पद चदा हुआ क़र्ज़ उतार सके ! वाह री सत्ता क्या हाल किया उस "चिड़िया" का जिससे लोग कभी कर्जे थे मांगते, आज वो खुद है हाथ फैलाए खड़ा !!!!
आज जो हमारे देश की हालत है, उसके पीछे क्या वास्तव में सिर्फ लालची सत्ता ही जिम्मेदार है ??? क्या इस देश की हालत के जिम्मेदार सिर्फ देश के वो नेता ही है जिन्होंने देश को लूटने में अंग्रेजो को भी कही पीछे छोड़ दिया है ??? क्या भ्रष्टाचार सिर्फ इन नेताओं की वजह से है ??? जवाब एक बार ध्यानपूर्वक सोच कर देखिये !!!
आज ये जागो इंडिया जागो का नारा अचानक तो नहीं लगा इसकी कोई तो वजह होगी ! आज जब हमे जब भी apna कोई kaam karwaana ho तो हम सबसे पहले क्या karte है dilli की bhasha में bole तो हम कोई jugaad dundte है किसी के admission से lekar naukri tak सब कुछ, bas एक jugaad से ho jaye यही तो हम chahte है फिर driving lisence से lekar IPL की ticket tak सब कुछ chahiye लेकिन bina कोई mehnat kare, aji samay kiske paas है aajkal
जब सब कुछ bus एक phone से sambhav ho तो क्या zaroorat की कोई driving test de या jaakar line में lage, तो क्या हुआ की हमारे इस khilaane के tarike से khane wala और khana sikh jaye , aji तो क्या हुआ की देश lagaatar इस bhrstachaar की gart में jata chla jaaye
हमे तो bus अपने kaam से matlab है और kaam ho jaane के बाद de denge हम भी इस सिस्टम को gaali, @#$!@ ये सिस्टम कभी नहीं sudhrega और kyu sudhre आखिर bigada भी तो हम ने ही है
लेकिन जब हम ise bigaad sakte है तो क्या ise sudharne का dam हम में नहीं है क्या हम इस सिस्टम को bachane के लिए कुछ नहीं कर sakte ???
आज kabir का likha एक doha yaad aa गया
"jyu til maahi tel है, jyu chakmak mah aag, tera saai tuj में jhak सके तो jhak"
तो जागो इंडिया जागो agar इस khaksaar की baato में zara भी dum होगा तो कोई तो zaroor jagega क्या होगा ऐसा ???????

6 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय बहन… आपकी बात कहने से पहले ये कहूँ कि अचानक ये आपके लेखन की भाषा को क्या हो गया.. अगर ये जान बूझकर किया गया है तो इसका कोई कारण समझ नहीं आता..और अनजाने में हुआ है तो पोस्ट करने के पहले ज़रुर देख लिया करें..
    आपने जो मुद्दे उठाये हैं वो बड़े सामयिक हैं..कई स्तर पर इस पर चर्चा भी हुई है ..लेकिन “जागो भारत जागो” के लिये ये ज़रुरी है कि “जो घर फूँके आपना चले हमारे साथ” या फिर “जोदि तोमार दाक सुने केउ ना आशे तोबे एकला चोलो रे” … जिस दिन यह मंत्र सिद्ध हो गया उस दिन क्रांति आई ही समझिये..

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  2. bilkul....hoga kyon nahi...
    khaksar ke baton me jaan hain, par kya kamon me bhi hai....aur agar hai to mera dava hai ki india jarur jagega jarur...
    vaise apne sahi jagah ungli dikhai hai ,,,doshi ham hai koi aur nahi aur hamen hi ise thik karna hoga...jise jahan mauka mile..........sarthak lekhni ke liye badhai...

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  3. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  4. आपके ब्लॉग पर आकर कुछ तसल्ली हुई.ठीक लिखते हो. सफ़र जारी रखें.पूरी तबीयत के साथ लिखते रहें.टिप्पणियों का इन्तजार नहीं करें.वे आयेगी तो अच्छा है.नहीं भी आये तो क्या.हमारा लिखा कभी तो रंग लाएगा. वैसे भी साहित्य अपने मन की खुशी के लिए भी होता रहा है.
    चलता हु.फिर आउंगा.और ब्लोगों का भी सफ़र करके अपनी राय देते रहेंगे तो लोग आपको भी पढ़ते रहेंगे.
    सादर,

    माणिक
    आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से सीधा जुड़ाव साथ ही कई गैर सरकारी मंचों से अनौपचारिक जुड़ाव
    http://apnimaati.blogspot.com


    अपने ब्लॉग / वेबसाइट का मुफ्त में पंजीकरण हेतु यहाँ सफ़र करिएगा.
    www.apnimaati.feedcluster.com

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  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  6. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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