शुक्रवार, जुलाई 28, 2017

उसकी कहानी (भाग-4 )

वो घबराई हुयी सी घर में चिल्लाते हुए पुरषोत्तम को उठाती है !
उठो जल्दी उठो नंदिनी के हॉस्टल से फ़ोन आया है उन्होंने अभी बुलाया है !
क्यों, क्या हुआ ??
(रोते हुए बोली ) नंदिनी हॉस्पिटल में है, उसने स्यूसाइड करने की कोशिश की है !
क्या ???
शोर सुन कर शशांक और विवेक भी अपने कमरे से बाहर आ जाते है ! दोनों को जब पता चलता है तो वो नंदिनी का हाल जान्ने के लिए उसे फ़ोन करते है लेकिन फ़ोन लगातार ऑफ आता है !
कुछ देर बाद ही चारो नंदिनी के हॉस्टल के लिए निकल जाते है ! रास्तेभर नंदिनी की माँ रोते हुए पुरषोत्तम को एक ही बात कहती रही कि आपने नंदिनी से बात क्यों नहीं की, वो कुछ बोलना चाह रही थी........  लेकिन आज पुरषोत्तम के पास इन बातों का कोई जवाब नहीं था ! वो लगातार बस यही सोच रहा था कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो नंदिनी ने स्यूसाइड जैसा रास्ता चुना और क्यों मैंने उससे बात नहीं की ! मैं क्यों थोड़ा सा टाइम नहीं निकाल पाया ??
इसी सब उधेड़बुन में शशांक का फ़ोन बार-बार बजता रहा सभी को लगता कि शयद नंदिनी की कोई खबर हो लेकिन नहीं वो फ़ोन हर बार शशांक के लिए ही होते !!
कुछ घंटो के सफर के बाद वो सभी अब नंदिनी के कॉलेज पहुंच चुके थे और वहाँ से वो कुछ कॉलेज टीचर्स के साथ हॉस्पिटल पहुँच गए !
नंदिनी की माँ लगातार रोये तेओ हुए डॉक्टर से नंदिनी का हाल पूछा डॉक्टर कुछ नहीं बोले !
तभी कुछ पुलिसकर्मी वहाँ आये और उन्होंने पुरषोत्तम से पूछा ....
 क्या आप नंदिनी के फादर है ?
हाँ, मैं ही नंदिनी का फॉदर हूँ कहाँ है नंदिनी कैसी है वो ???
जब आपको फ़ोन किया था तभी नंदिनी को यहाँ लाये थे लेकिन उनकी हालत ठीक नहीं थी
मतलब ??
सर डॉक्टर्स ने काफी कोशिश  की लेकिन सॉरी वो उसे बचा नहीं पाए !
पुरषोत्तम ये सुन वहीँ फर्श पर निढाल हो जाता है वो ना रो पाता है और ना ही कुछ कह पाता है !!
अब शायद उसे भी ये पछतावा है कि वो अपनी बेटी की बात नहीं सुन सका, वो किस परेशानी से गुजर रही थी,
वो क्या चाह रही था, क्यों वो उसे कुछ मिनट नहीं दे पाया ??
तभी वहाँ एक पुलिसकर्मी आता है और पुरषोत्तम के हाथ एक कागज देता है !
ये आपकी बेटी के बैग से मिला था आपके लिए लिखा है !
पुरषोत्तम वो कागज़ खोल कर देखता है  और अपनी जेब में रख लेता है !
......................................................................................................
 to be continued ........



शनिवार, जुलाई 15, 2017

उसकी कहानी (भाग -3 )

शाम 7 बजे
अच्छा विवेक अब मैं जाती हूँ वैसे भी बहुत देर हो गयी !
सोनल, थोड़ी देर और रुको ना वैसे भी मम्मा अभी नहीं आएँगी वो जब भी पार्टी जाती है तो देर से ही आती है !(सोनल, विवेक की ही सोसायटी में रहती है !)
और अंकल ??
अरे यार पापा तो आते ही लेट है !
और शशांक भईया ??
अरे आज वो भी अपने फ्रेंड्स के साथ बाहर गए है पता नहीं कब आएंगे !
ओके, लेकिन मेरी मम्मा आने वाली होंगी ना, इसलिए उनके घर पहुँचने से पहले मुझे जाना होगा !
ओह्ह,,, ठीक है लेकिन नेक्स्ट कब आओगी ???
जब तुम फ्री हो !! (हँसते हुए )
ओके चलो बाय !
सोनल को बाहर तक छोड़ने जाता है फिर वापस आकर दरवाजा बंद करके टीवी के सामने बैठ जाता है ! थोड़ी देर बाद डोर बेल बजती है ! विवेक दरवाजा खोलता है ! सामने उसकी मम्मा थी !
अरे आप आ गए !
हाँ, आज थोड़ा देर तक चली पार्टी ! मेड काम कर गयी ??
नहीं, आयी नहीं आज वो !!
तूने मुझे फोन करके क्यों नहीं बताया ??और शशांक कहाँ है घर में नहीं है वो ??
अरे मैं आज सो गया था और भईया भी आपके जाने के बाद ही चले गए थे !
कहाँ गया वो ??
पता नहीं कुछ फ्रेंड्स आये थे उनके, उन्ही के साथ गए !
ठीक है !! अच्छा सुन आज खाना बाहर से ही आर्डर कर ले सबके लिए , मैं बहुत थक गयी हूँ !!
ठीक है !!
और  शशांक को भी फोन करके पूछ ले कब तक आयेगा ??
ओके मम्मा !!
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रात करीब 9 बजे......
डोर बेल बजी !
उसने दरवाजा खोला, देखा शशांक खड़ा था
अरे, कहाँ था तू ??
अरे वो दोस्त के घर गया  था कुछ काम था !!
क्या काम था ??
कुछ ख़ास नहीं बस वैसे ही कुछ था !
पता नहीं समझ नहीं आते तेरे काम भी !
अच्छा खाना क्या बना है !
आज बाहर से मंगाया है !!
अरे यार परसो भी बाहर से मंगाया था !! क्या मम्मा, बनाया क्यों नहीं कुछ !!
मैं बस थक गयी थी, आज खा ले कल बना दूंगी !!
इसी बीच पुरुषोत्तम भी आता है और सभी खाना खाकर सो जाते है !
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रात करीब 2 बजे शशांक का फोन बजता है !
उधर से आवाज आती है
कहाँ है शशांक आया नहीं अभी तक !
हाँ बस 15 मिनट में आ रहा हूँ तू मेरा गेट पर ही वेट कर  !
ठीक है मैं यही खड़ा हूँ तू जल्दी आ !
शशांक चुप-चाप घर के बाहर चला जाता है !!!
.......
अरे यार कितनी देर लगाता है तू !!
हाँ, अब आ गया ना, अच्छा सामान लाया है ना तू !!
हाँ, लाया हूँ अब चल जल्दी कर !
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शशांक करीब साढ़े तीन बजे घर वापस आता है वो दूसरी चाबी से गेट खोलता है और वापस अपने कमरे में जाकर सो जाता है !
तभी घर का लैंडलाईन फोन बजता है !! शशांक घबरा जाता है !!
फोन शशांक की मम्मा उठाती है ! फोन नंदिनी के हॉस्टल से है !!
नंदिनी के पेरेंट्स को फ़ौरन हॉस्टल में बुलाया गया है !!
to be continued .........

गुरुवार, जुलाई 06, 2017

उसकी कहानी (भाग २ )

नंदिनी जल्दी उठ यार  क्लास शुरू होने वाली है !
शैला, प्लीज़ सोने दे ! सर बहुत दर्द कर रहा है ! (शैला नंदिनी की रूम मेट है )
मैडम क्लास शुरू होने  में २० मिनट है उठ जा वरना आज भी क्लास मिस हो जाएगी !
प्लीज़ यार सोने दे ना !
और वैसे तू सारी रात थी कहाँ ?? और  ये हाथ पर क्या हुआ ये किस चीज़ का निशान है ??
(नंदिनी अपना हाथ खींचते हुए )कुछ नहीं है तू जा , मैं आती हूँ अभी थोड़ी देर में
लेकिन ये है किस चीज़ का निशान ये तो बता !!
कहा ना कुछ नहीं, तू जा मैं रेडी होकर आती हूँ !
नंदिनी ये निशान सिरिंज का  है ना ??
तू जा ना मैं आती हूँ !
नंदिनी, कहाँ थी तू रात को ??
फ्रेंड के साथ पार्टी में थी !!
कौन से फ्रेंड ??
तू नहीं जानती उनको और तू जा अब मैं आ जाउंगी !
ओके बाय !!
बाय !!
(अपना फोन निकाल कर नंबर डायल करती है  ) हेलो मम्मा, पापा कहाँ है ??
वो तो ऑफिस गए आज जल्दी जाना था उन्हें !!
ओके !!
बोलो क्या काम था पैसे चाहिए क्या ??
नहीं रहने दो है मेरे पास !
हम्म्म, तू क्लास में नहीं है !
हाँ, बस जा रही हूँ पापा आये तो बता देना !!
वो आजकल देर से ही आ रहे है ऑफिस में काम थोड़ा ज्यादा है !! कुछ काम है  तो मुझे बता !!
नहीं कुछ नहीं !!
चल ठीक है मुझे वैसे भी अभी सोसायटी की पार्टी में जाना है मैं बाद में बात करती हूँ !
हम्म्म्म !!
कुछ चाहिए तो बता दे !
नहीं कुछ नहीं ! चलो बाय !
बाय !!
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विवेक , बेटा मैं जा रही हूँ खाना बना दिया है दोनों खा लेना  !
हाँ ठीक है ! कब तक आओगे ?
5 -6 बजे तक आउंगी !
ओके बाय मम्मा !
बाय और भाई को भी उठा देना !
हाँ ठीक है मम्मा !
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थोड़ी देर बाद डोर बेल बजी विवेक ने दरवाजा खोला तो कुछ लड़के लड़किया खड़े थे बाहर, उन्होंने शशांक को बुलाने को कहा विवेक शशांक को बुला लाया !
विवेक मम्मा कहाँ है ??? (बाहर से ही पूछता है )
किसी पार्टी में गयी है शाम तक आएँगी !
चल ठीक है मैं जरा बाहर जा रहा हूँ थोड़ी देर में आ जाऊंगा !
कहाँ जा रहे हो ??
जा रहा हूँ अभी थोड़ी देर में आ जाऊंगा !
भाई खाना तो खा लो !
मैं बाहर ही खा लूंगा तू खा ले चल बाय !
हम्म्म, बाय !!
to be continued .............

शुक्रवार, जून 30, 2017

उसकी कहानी ( भाग -1 )

अभी बस वो काम ख़त्म करके आरामकुर्सी पर बैठी ही थी कि उसकी आँख लग गयी अचानक डोर बेल बजने पर उसकी नींद टूटी घड़ी की तरफ नजर गयी तो देखा रात के10 बज चुके थे तभी दोबारा बेल बजी इस बार वो फुर्ती से दरवाज़े की तरफ गयी दरवाज़ा खोला तो सामने पुरुषोत्तम खड़े थे !
लगभग गुस्से भरे स्वर में बोले कब से बेल बजा रहा हूँ क्या कर रही थी ???
बस ज़रा आँख लग गई थी , तुम बैठो मैं पानी लाती हूँ !!
पानी रहने दो सीधा खाना लगा दो बहुत भूख लगी है !!
हाँ, ठीक है लगाती हूँ !
खाना लगाते हुए .....आज बहुत देर कर दी आने में बच्चें भी इंतजार करके सो गए !!
हाँ, आज ऑफिस में काम थोड़ा ज्यादा आ गया था ! बच्चों ने तो खाना खा लिया ना ???
हाँ, तुम्हारा इंतजार करते करते खा लिया फिर टीवी देखते देखते सो गए !!
नंदिनी का फ़ोन आया ??
(नंदिनी, पुरुषोत्तम की सबसे बड़ी बेटी है और अभी वो हॉस्टल में रह रही है )
हाँ आया था , थोड़ी परेशान थी
क्यों ????
हॉस्टल में उसके साथ के कुछ बच्चों से उसका झगड़ा हो गया !!
इस बार पुरुषोत्तम फिर गुस्से से बोला , ये लड़की वहाँ पढ़ने गयी है या सबसे लड़ने ?? रोज रोज का तमाशा बना लिया है इसने ....नहीं होती पढ़ाई लिखाई तो कह दो घर वापस आ जाये !!
अरे , आप सुन तो लो एक बार कि हुआ क्या है !!!
नहीं सुनना मुझे कुछ रोज़ का तमाशा है इस लड़की का !!!
अरे, लेकिन एक बार ......
(बीच मे बात काटते हुए) आज तुम विवेक और शशांक की PTM में स्कूल जाने वाली थी ना क्या हुआ ??
हाँ, गयी थी विवेक तो ठीक है स्कूल में, लेकिन शशांक की थोड़ी कम्प्लेन आई है !!
(थाली सरकाते हुए गुस्से से ) पता नहीं इन दोनों की शिकायतें आना कब बंद  होंगी थक गया हूँ इनकी रोज रोज की  सुनते सुनते !!तुम करती क्या हो सारा दिन ध्यान क्यों नहीं रखती इन दोनों का  ???
नंदिनी आपसे बात करना चाह रही थी
कह दो उससे पैसे खत्म हो गए है तो तुम्हें बता दे मैं भेज दूंगा
नहीँ, वो शायद कुछ कहना चाह रही थी
(खाने की टेबल से उठते हुए) मैं सोने जा रहा हूँ सुबह जल्दी उठा देना कल सुबह ऑफिस में मीटिंग है , गुड नाईट !!
गुड नाईट !!!
to be continued .....

रविवार, मार्च 09, 2014

क्यों जन्म दिया ??

मेरे घर से कुछ दूरी पर एक तीनमंजिला मकान बना हुआ हैं जिसमे एक-एक मंज़िल पर कई कई किरायदार रहते है उनमे से ही एक परिवार ऐसा है जिसमे आठ सदस्य है ! माता पिता,चार बेटियां और दो बेटे ! बेटियां बड़ी हैं और दोनों बेटे छोटे ! अक्सर इनमे से सबसे छोटा बेटा जिसकी उम्र तकरीबन आठ या नौ वर्ष की होगी वो अक्सर हमारे घर खेलने आ जाया करता है पहले आने में हिचकिचाता था लेकिन धीरे धीरे वो खुल गया और मेरे बेटे को भी (जिसकी उम्र दो वर्ष है ) उसके साथ खेलना अच्छा लगने लगा ! अब दोनों शाम को अक्सर साथ खेला करते हैं ! मैं भी अक्सर उनके खेल में शामिल हो जाया करती हूँ इसी दौरान मैं उससे कुछ बातें भी कर लिया करती हूँ और बातों बातों में ही पता चला कि वो आठ सदस्यो का परिवार किस तरह रहता है! हुआ यूँ कि एक दिन जब खेलते खेलते बाहर अन्धेरा नज़र आया तब मेरी नज़र घडी पर गयी देखा तो नौ बज चुके थे, मैंने फ़ौरन उसे उसके घर जाने को कहा, "कहा कि बहुत देर हो गयी है अब तुम अपने घर जाओ तुम्हारी मम्मी चिंता कर रही होंगी " "इस पर वो हँसते हुए बोला कि नहीं मेरी मम्मी कुछ नही कहती" मुझे सुन कर हैरानी हुई ! मैंने फिर पूछा क्यों, तुम्हे देर से जाने पर डाँट नहीं पड़ती ?वो बोला "नहीं बल्कि उसकी मम्मी तो सो चुकी होंगी !" ये बात सुन कर हैरानी और बढ़ गयी सोचने लगी कि कैसी माँ है बच्चा घर से बाहर खेल रहा है और वो सो भी गयी !लेकिन उसके बाद जब मैंने उससे इस सब कि वजह पूछी तो जो बात सामने आयी उससे बड़ी हैरानी भी हुई और तरस भी आया !

असल में उस बच्चे की माँ घरो में झाड़ू पौछे का काम किया करती है और उसके पिता बेलदारी का काम करते है लेकिन फिलहाल वो घर में ही रहते है और उस बच्चे के कहे अनुसार उसके पिता रोज़ शराब पी कर घर में झगड़ा करते है और उस बच्चे को भी अक्सर मारा पीटा करते है जिस वजह से वो बच्चा अक्सर देर रात को ही अपने घर जाना पसंद करता है ! उसके बाद उसने बताया कि उसकी मम्मी रोज़ सुबह घर के सभी सदस्यो के लिए खाना बना कर और बाकी काम ख़त्म करके तक़रीबन छह बजे काम के लिए निकल जाया करती है और साथ उसकी बहने भी घरो में काम करने जाती है ! सबसे बड़ी बहन के बारे में उसने बताया कि उसकी शादी हो चुकी है और वो भी घरो में काम किया करती है और एक बहन किसी के घर में रहती है और वही रेह कर काम करती है !फिर मैंने पूछा और तुम दोनों भाई क्या करते हो तो वो तपाक से बोला मेरा भाई मोबाईल की दूकान पर काम करता है (जिसकी उम्र उसे पता नहीं बस इतना पता है कि वो आठवी क्लास में पढता है) और उसे पाँचसौ रुपए महीना मिलता है, और मैं यहाँ आ जाता हूँ ! ये सब सुन कर सच में एक बार तो बड़ा गुस्सा आया कि कैसे माँ बाप है जो अपने बच्चो से इतनी छोटी उम्र में काम करवा रहे है और जिन्हे अपने बच्चो की बिलकुल फ़िक्र ही नहीं कि वो सारा दिन कैसे रहते है कहाँ जाते है क्या करते है ?



अक्सर जब किसी बच्चे को इस तरह के हालात में देखती हूँ तो यही एक सवाल मन में उठता है कि आखिर क्यूँ इसके माँ बाप ने इसे पैदा किया जब वो इसे सही ढंग से पाल ही नहीं सकते तो क्यूँ इस बेचारे की ज़िंदगी इतनी बत्तर बना दी ? ये सवाल मैं अक्सर जब किसी माता पिता से पूछती थी तो जवाब मिलता था "अरे बेटा ये किसी के हाथ में नहीं होता ऊपरवाले ने इनकी किस्मत में यही लिखा है तो कोई क्या करें, कौन से माँ बाप चाहते है कि उनका बच्चा भूखा रहे और पढ़ लिख न सके !" उनकी इस बात पर मैं अक्सर यही सोचती अरे किस्मत उपरवाले ने लिखी है लेकिन किस्मत लिखवाने के लिए ऊपरवाले के पास पैदा करके तो माँ बाप ने ही भेजा है !लेकिन इस सबके बीच एक और बात भी सामने आती और वो ये कि बहुत से लोग सिर्फ एक लड़के के माता पिता कहलाने के चक्कर में इतने बच्चे पैदा कर लिया करते है ! अगर इस बात पर गौर करा जाए तो जिस परिवार का ज़िक्र मैंने किया है उसमे भी चारो बेटियां बड़ी ही है और बेटे छोटे, तो ये माना जा सकता है कि शायद उस माँ ने भी एक अदद बेटे की चाह में इतने बच्चो को जन्म दिया हो !



उफ्फ्फ !! मतलब फिर वही सब, घर में एक बेटा होना चाहिए बड़ा होकर जो माँ बाप का सहारा बनेगा कुल का नाम आगे बढ़ाएगा वगैरह वगैहरा !! अब बेटा होना चाहिए या नहीं होना चाहिए मैं इस विषय पर बात नहीं करना चाहती, हाँ लेकिन मैं एक सवाल उन सभी माता पिता से ज़रूर पूछना चाहूंगी जिन्होंने बेटे कि चाह में कई बच्चे पैदा किये है, क्या वो अपने सभी बच्चो को भरपूर पालन पोषण कर रहे है ?? इसे कुछ यूँ समझते है अभी मैंने ऊपर जिस लड़के की बात की मैं यहाँ भी उसी का उधाहरण देते हुए कहूँगी मैं जब भी उससे कुछ खाने के लिए पूछती तो वो झट से हाँ कह देता और जो भी मैं उसे देती वो बिना स्वाद लिए झट से खा लेता है धीरे धीरे वो रात का खाना भी मेरे बेटे के साथ ही खा कर जाने लगा और मैं भी बड़े शौक से दोनों को खाना खिला देती लेकिन धीरे धीरे मुझे अहसास हुआ कि वो खाना खाने के बाद फ़ौरन ही अपने घर चला जाता था लगा जैसे वो सिर्फ खाना बनने के इंतज़ार में है इतिफाक कि बात है कि अगले ही दिन मुझे खाना बनाने में थोड़ी देर हो गयी और मेरा बेटा भी दूध पी कर सो चुका था तो बचपन मैंने भी उसे जाने के लिए कह दिया लेकिन उस दिन उसका जाने का मन नहीं हुआ असल में वो खाने के इंतज़ार में था तभी मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी मम्मी ने क्या बनाया है उसने कहा "पानी वाले आलू" और साथ में ये भी कहा कि उसे वो अच्छे नहीं लगते ! मैंने कहा ठीक है थोड़ी देर रुको फिर यहीं खाना खा जाना और उस दिन के बाद से वो अक्सर रात का खाना मेरे घर पर ही खा कर जाने लगा इस दौरान मैंन जब भी उससे पूछा कि तुम्हारे घर पर क्या बना है तो उसके जवाब में अक्सर पानी वाले आलू ही हुआ करते थे ! अब कोई ये समझाए कि प्रतिदिन आलू कि सब्ज़ी और रोटी खिला देने भर को सम्पूर्ण पोषण कहा जा सकता है ?



अब तक मैंने एक ख़ास वर्ग कि ही बात की लेकिन ये बात सभी पर लागू होती जब हम अपनी कमाई से इतने बच्चो का पालन नहीं कर सकते इन्हे भरपेट भोजन नहीं से सकते, इन्हे अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते, तो क्यों इन्हे पैदा करते है ?? क्यों इन्हे बचपन में ही कमाई करने के लिए मजबूर कर देते है ?? क्यों इनका बचपन नरक बना देते है ?? जिस बेटे के लिए इतने बच्चे पैदा किये जाते है क्या उस बेटे की ही आधारभूत ज़रूरत पूरी हो पाती है ??और जिस बेटे को पाने के चक्कर में इतने बच्चे पैदा किये क्या उनकी ज़रूरते हम पूरी कर पाते है ?? क्यों हम अपने ही बच्चो को पिछड़ा और पिछड़ा बनाते चले जाते है, क्यों हम इस सोच से ऊपर नहीं उठ पाते कि बच्चा चाहे जो भी हो लड़का या लड़की हमे उसे हर स्तर पर आगे बढ़ाना है उसकी आधारभूत ज़रुरतो को पूरा करना है !! क्यों हम ना चाहते हुए भी, या सिर्फ एक लड़के की चाह में एक के बाद एक बच्चे पैदा करते जाते है ? क्यों ??



सोमवार, नवंबर 29, 2010

आज यही सही !!!!!

लबो पर उसके कभी बद्दुआ नहीं  होती
बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती

इस  तरह  मेरे गुनाहों को वो धो देती है,
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

अभी जिंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ  जाती है
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है

ए अँधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया,
माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया

मेरी ख्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊ
माँ से इस तरह लिप्टू कि बच्चा हो जाऊ

'मुनव्वर' माँ के आगे यूँ कभी खुलकर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

लिपट जाता  हूँ माँ से और  मौसी मुस्कुराती है,
मैं उर्दू  में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी  मुस्कराती  है

मुनव्वर राणा 
 

बुधवार, अक्तूबर 06, 2010

हमें कोई तो सुधारे !!!!

आज भारत दुनिया के उन देशो में है से एक है जहां की जनसख्याँ में युवाओ की संख्या का  प्रतिशत सबसे  अधिक है और यही वजह है की  आज भारत को "यंग इंडिया" भी कहा जाता है ! ये जान कर ख़ुशी होती है की आज भारतीय  युवा दुनिया में अपनी  एक अलग पहचान बना रहा है ! आज भारत का युवा वर्ग हर क्षेत्र में आगे बढ़ कर अपनी मोजूदगी भी दर्ज़ करा रहा है ! ऐसे बहुत से  यंग लीडर है जिहोने अपने क्षेत्र में ना सिर्फ अपनी एक पहचान बनाई है बल्कि अपने क्षेत्र में कई असरकारक कार्य भी किए है ! अभिनव बिंद्रा,नारायण मूर्ति, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रियंका चोपड़ा, सुशिल कुमार,बिजेंद्र सिंह, मिताली राज़,झूलन गोस्वामी, अंकित फाडिया, सिद्दार्थ वरदराजन, नारायण मूर्ति, सुष्मिता सेन जैसे नाम आज भारतीय यंग ब्रिगेड का हिस्सा है ! ये वो बड़े नाम है जो आज विश्व पटल पर अपना परचम लहरा रहे है !
वही इसके उलट आज भारतीय युवा वर्ग में एक ऐसा वर्ग भी है जो नाम,दोलत,शोहरत सब  कमाना चाहता है लेकिन बिना किसी मेहनत के या फिर एक बहुत छोटे शोर्टकट के साथ और आज ऐसे युवाओ की संख्या दिनोंदिन बदती जा रही है ! पिछले कुछ दिनों से अखबार के पन्ने ऐसी खबरों से अटे पड़े रहे ! जिसमे से एक खबर में दिल्ली में एक बी कॉम फ़ाइनल ईअर की युवती करोडो के गहनों के साथ पकड़ी जाती है और कुछ दिन पहले गाज़ियाबाद में एक ३० वर्षीय विवाहित युवक करोडो के गहनों के साथ पकड़ा जाता है युवती का गुनाह अभी साबित नहीं हुआ लेकिन युवक के गुनाह के साबित होने के बाद पता लगा की वो अपने शौक के लिए चोरी करता था ! इसके अलावा आज का भारतीय युवा चेन स्नेचिंग,झपटमारी,चोरी की वारदातों, हत्या नशाखोरी, साइबर क्राइम जैसे और ना जाने कितने ही अपराधो में लिप्त होता जा रहा है ! लेकिन इस सबकी वजह क्या है ! क्यों आज युवा वर्ग इस अपराध की दुनिया की तरफ आकर्षित होता जा रहा है ?? बल्कि सारी सुविधाए मिलने के बाद भी क्यों आज धनाड्य वर्ग के युवा भी इस ओर आकर्षित हो रहे है ?? क्यों वो इतनी आसानी से इस ओर मुड़ रहे है ??
अगर इन सबकी वजह तलाशी जाये तो एक नहीं अनेक होंगी ओर सबका अपना अपना कारण  होगा ! सबसे बड़ा कारण जो आजकल ज़्यादातर लोगो के मुह से सुना है वो है आज की फिल्मे और  टीवी पर आने वाले शोस जो इन युवाओ को बिगाड़ने  में पर्याप्त है ! लेकिन क्या सिर्फ यहीं एक कारण है अक्सर बुजुर्गो को युवाओ के पहनावे को लेकर कहते सुना है कि आजकल के लड़के लडकियों ने तो हद ही कि हुई है कोई शर्म हया नहीं बची इनमे ! मुझे याद है कि मेरे घर पर एक बुजुर्ग महिला आती है जो कि हरियाणा से है और अक्सर आज के युवाओ के पहनावे को लेकर अपनी भाषा में एक बात ज़रूर कहती है "आजकल के छोरे छोरियां ने देख के तो  पता ही को नी चालता कि छोरा कोण  ते अर छोरी कोण !" जिसे सुन कर मुझे अक्सर हँसी आ जाती है वैसे उनका कहना  गलत भी नहीं है खुद में एक दो बार मेट्रो ट्रेन में लडको को लड़की समझने की गलती कर चुकी हूँ ! अक्सर देखा जाता है की जहां बड़े बुजुर्ग बैठे हो वहाँ आज के युवाओ पर चर्चा ज़रूर होती है  जिसमे सभी अपने अपने विचार व्यक्त  करते नज़र आते है ! किसी की नज़र में आज का युवा जोशीला होता है तो कोई कहता है की गर्म  खून है इसलिए ऐसा है तो किसी की नज़र में ये सब माता पिता की शय का असर होता है तो किसी की नज़र में ये आजकल की फिल्मो में उटपटांग  चीजों को देखकर बिगड़ रहे है ! 
सबके अलग अलग विचार है आज के युवाओ को लेकर ! जोकि गलत भी नहीं है लेकिन अगर आज के युवा वर्ग को उसी की नज़र से समझा जाए तो और भी कई कारण सामने आयेंगे और सबसे बड़ा और पहला कारण जो मुझे नज़र आता है वो है "पियर प्रेशर" जो बहुत ज़ल्दी और गहरा असर करता है और जिसने कभी मेरे ऊपर भी असर करने की कोशिश  शुरू की थी  लेकिन उस वक़्त अपने टीचर्स और मम्मी-पापा के सपोर्ट के चलते मैं तो इस पियर प्रेशर से बच गयी, लेकिन ये सच है कि इसकी वजह से कई युवा ना चाहते हुए भी ऐसे काम करने लगते  है जिसे वो जानते है कि वो गलत है लेकिन अपने दोस्तों के सामने टशन मारने के लिए और उनके सामने खुद को कमतर ना आंके  जाने लिए वो इसे ज़रूरी भी समझते है ! ये इसी का नतीजा है कि छोटी सी उम्र में ही कश लगाने से लेकर ड्रग्स जैसी नशीली चीजों के प्रोयोग से वे खुद को मोर्डन और बेहतर साबित करना चाहते है इसके अलावा आज अक्सर एक चीज़ जो हर छोटे चौक चोराहो  से लेकर मॉल्स, शोपिंग काम्प्लेक्स जैसे बड़ी जगहों पर नज़र आती है और वो ये है, हाथो में हाथ डाले घूमते हुए प्रेमी युगल ! अब वो कितने सच्चे और कितने झूठे होते है ये तो वही जाने लेकिन इस सबसे एक बात ज़रूर साबित हो जाती  है की गर्ल फ्रेंड और बॉय फ्रेंड रखना अब एक फैशन  बन गया है ठीक उस तरह जैसे कि कभी महंगे मोबाईल और गेजेट रखना फैशन के साथ-साथ स्टेटस सिम्बल हुआ करता था  और अब ये फैशन इस कदर परवान चड़ने लगा है कि युवा वर्ग अपनी इन ज़रुरतो को पूरा करने के लिए अपराधिक दुनिया में कदम रखने से भी नहीं हिचकता बल्कि अब वो अपनी इंटेलिजेंस, अपने जोश और जूनून का भरपूर फायदा अपराध जगत में शमिल होकर उठाने लगा है ! अभी पिछले दिनों एक फिल्म आई थी "बदमाश कम्पनी" जिसमे कुछ युवाओ को अपने अनोखे लेकिन "गैरकानूनी" आइडियास के चलते शोर्टकट के सहारे लखपति बनते दिखाया गया था ! वास्तव में यही है आज का कडवा सच ! जिसे आज हर कोई सुधारना चाहता है !
हम युवाओ को सुधारने कि ज़िम्मेदारी हमारे अपनों की ही है लेकिन जिस तरह गहनों की चोरी के मामले में पकड़ी गयी लकड़ी को उसके घरवाले ने इज्ज़त का हवाला देते हुए उसे अपने घर से बरसो पहले निकाल दिया था अगर इसी तरह आज हर माता-पिता करने लगे तो शायद ही कोई सुधरे इसलिए अगर आज वास्तव में पथ भ्रमित हो चुके युवाओ को कोई सुधारना चाहता है या सुधार सकता है तो वो उनके टीचर्स और उनके माता-पिता ही है खासतौर पर टीचर्स की ज़िम्मेदारी थोड़ी ज्यादा होती है क्योंकि घर के बाहर एक वही होते है जो हमें समझ सकते है और समझा सकते है !