मंगलवार, जून 08, 2010

नेता जी की नरक यात्रा ...................

एक भ्रष्ट नेता जी, (ईमानदार  नेता के साथ भगवान् ऐसा कभी ना करे) की कार दुर्घटना  में मृत्यु हो गई ! ( ऐसा अक्सर होता नहीं है ) मृत्यु के बाद उनकी आत्मा को यमराज  एक बड़ी सी लिफ्ट में यमलोक लेकर पहुंचे ! आखिर वीआईपी जो ठहरे, अब भैसे पर तो आम आदमी ही बैठता है ! खैर ......यमलोक पहुचे तो  नेताजी से पूछा गया की कहाँ रहना पसंद करेंगे नरक में या स्वर्ग में ????  नेताजी जी सोच में डूब गए की कहाँ रहा जाये ??? तभी एक यमदूत ने उन्हें कहा की आपकी सहूलियत के लिए हम आपको एक-एक दिन दोनों जगह रहने देते है उसके बाद आप फैसला लेना कि कहा रहना है ! नेताजी को बात जँच गई और उन्होंने तुरंत हामी भर दी !
उसके बाद नेताजी को पहले नरक दर्शन के लिए ले जाया गया, उसी बड़ी वाली लिफ्ट में ! लिफ्ट ऊपर जाने लगी , और थोड़ी देर में लिफ्ट में ऊपर पहुँच गई ! जैसे ही लिफ्ट का दरवाज़ा खुला सामने नरक था ! नरक को देखते ही नेताजी की आँखे चोंधिया गई ! बाहर एक बड़ा सा गोल्फ कोर्स बना हुआ था जहां कई लोग गोल्फ का आनंद ले रहे थे, थोडा और अन्दर जा कर देखा तो एक बड़ा सा बीअर बार बना हुआ था जहां नेताजी की पसंद के अनुरूप सभी सुविधाए मोजूद थी ! वही नेताजी के सभी यार दोस्त भी बैठे हुए मिल गए ! नेताजी ने सभी के साथ बड़ा आनंद लिया, और इस तरह एक दिन कब बीत गया नेताजी को पता भी नहीं चला !
अगले दिन फिर से वही यमदूत नेताजी को लेने आ गया ! नेताजी फिर से लिफ्ट में सवार हुए और चल पदे स्वर्ग की ओर ! लिफ्ट थोड़ी ही देर में स्वर्ग पहुँच गई ! जैसे ही नेताजी ने स्वर्ग में प्रवेश किया तो वहाँ देखा की चारो तरफ सत्संग चल रहा है ! लोग ध्यान पूजा में मग्न है ! हर कोई ईश्वर भक्ति में मंत्मुघ्द हुआ बैठा है ! ये सब नेताजी को अच्छा तो लगा पर बहुत अच्छा नहीं ! यहाँ तो नेताजी के लिए एक दिन भी बिताना मुश्किल हो गया ! परेशान नेताजी ने जैसे-तैसे एक दिन काटा ! अगली सुबह फिर से वही यमदूत नेताजी को लेने पहुँच गया ! नेताजी फिर से उस बड़ी वाली लिफ्ट में सवार हुए ! थोड़ी देर में लिफ्ट यमराज के ऑफिस के बाहर रुकी !
अब नेताजी को एक फॉर्म भरने के लिए दिया गया, जिसमे उनसे पूछा गया की वो नरक में रहना पसंद करेंगे की स्वर्ग में ???
नेताजी ने जवाब में लिखा " वैसे तो स्वर्ग अच्छा है लेकिन वहाँ मेरी जान पहचान का कोई भी नहीं है ओर नरक में तो अपने सभी यार दोस्त है ही ओर मेरी पसंद की सभी चीज़े भी है वहाँ मौजूद है, तो इस कारण वश मैं नरक में ही रहना चाहूँगा !" ओर ये लिख कर नेताजी ने अपना फॉर्म जमा कर दिया !
नेताजी की इच्छा को माना गया ओर यमराज ने अपने यमदूत से कहा की इन्हें अगले दिन नरक में भेज दिया जाए ! नेताजी ये सुन कर बड़े खुश हुए !
अगले दिन नेताजी को यमदूत ने फिर से लिफ्ट में बैठाया ओर चल दिए नरक की ओर ! लिफ्ट धीरे-धीरे ऊपर जाने लगी ओर नेताजी की ख़ुशी तेजी से बदती गई ! थोड़ी देर बाद नरक आ गया ओर नेताजी को वहाँ छोड़ा गया ! लेकिन ये क्या नेताजी को तो अचानक गुस्सा आ गया ! उन्हें नरक में ना तो वो गोल्फ कोर्स दिखा ओर ना बीअर बार और ना ही अपने वो सभी दोस्त ! बल्कि आज तो नरक में चारो तरफ गंदगी  फैली हुई थी ओर वहाँ सभी लोगो की काम ना करने के कारण पिटाई भी लगाई जा रही थी ! ये देख कर नेताजी घबरा गए ! उन्होंने यमदूत से पूछा, ये सब क्या है ???? कल तो यहाँ बढ ही सुन्दर नज़ारा था ओर आज ये सब क्यों ????
तब यमदूत ने बड़े प्यार से बोला "वो क्या है ना नेताजी कल स्वर्ग ओर नरक के इलेक्शन थे ओर हमें आपका वोट चाहिए  था, बस इसलिए ही आपको वो सब्जबाग दिखाया गया था ! अब आप यही रहिये !"
भगवान् नेताजी की आत्मा को शांति दे !!!!!!!

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत जोरदार व्यंग्य!! पढ़ कर आनंद आ गया। धन्यवाद।

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  2. काश कि ऐसा होने लगे...वैसे कुछ बिल्डर और प्राधिकरण भी आ जायेंगे इस दायरे में..

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  3. ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha aha ha ha aha ha............................

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  4. नेताओं का सही स्थान तो नरक ही है!

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  5. हा हा हा हा हा ...हर नेता का येही हाल होना चाहिए ताकि आम जनता का दर्द मालूम पड़े...बहुत खूब लिखा है आपने...
    नीरज

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  6. @ नीरज जी
    ये कहानी मैंने नहीं लिखी ये तो किसी दोस्त ने सुनाई थी अच्छी लगी तो पोस्ट कर दी !
    कोष्टक में लिखे वाक्य, कहानी का शीर्षक और आखिरी लाइन ही मेरी लिखी हुई है !

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  7. सोनी बिटिया! इसको कहतेहैं जैसे को तैसा… लेकिन पता है कि नहीं, हम भी एगो कहाँई सुने थे दोस्त से, जो तुमरा पोस्ट को आगे ले जाता है... ऊ नेता जी को नरक में भी कोनो कष्ट नहीं हुआ… काहे कि ऊ काँटा वाला बिछौना में सब काँटा खराबहो गया था, करेंट मारने वाला कुर्सी में करेंट नहीं था लोड शेडिंग के कारन... अऊर कोड़ा मारने वाला आदमी सब हड़ताल पर था... नेता लोग सब जगहे एंज्वॉय करता है...
    सम्वेदना के स्वर पर तुमरा बात अच्छा लगा... अभी भी टाइम है..अपना बात टिप्पनी में दे सकती हो... वैसे भी इसका प्रेरना त तुमरा कमेंटवे से मिला था.. ठीके लिखे हैं चैतन्य बाबू!!

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  8. नेता जी को तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा… उन्होंने तो वैसे भी देश को नर्क बना रखा है... बिल्कुल ऐट होम फ़ील करेंगे... और नर्क में एक और फ़ायदा है..वहाँ से नेता जी के देश बात करने पर भी लोकल कॉल रेट लगेंगे..रोमिंग भी नहीं... हुआ न फ़ील गुड...

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  9. अगर मैं ग़लत नहीं हूं तो यह रचना इस हफ्ते नवभारत टाइम्स में किन्हीं जसविंदर शर्मा के नाम से छपी है।

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  10. @ नीरज बधवार जी
    में तो पहले ही कह चुकी हूँ की ये रचना मेरी नहीं है किसी से सुनी थी, अच्छी लगी तो पोस्ट कर दी ! आप कह रहे है की ये रचना नवभारत में छपी थी तो सही ही होगा ........इस बारे में मैं कुछ कह नहीं सकती ! .........

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  11. Soni ji Behtar ye hota ki aap is rachna ko JASWINDER SHARMA ke naam se hi deti or PRASTUTKARTA ke roop me apna naam deti to theek tha.

    Neeraj ji ko badhai is satya ko ujagar karne ke liye.....par Soni ji aapne unhe uttar galat diya...darasal aapne yeh rachna kahin suni nahi padi hai...

    Soni ji Achhi rachnaon ki prastuti sarahneeya hai lekin mool rachnakaar ke naam evm jahan se rachna lee gayi hai uska naam bhi saabhar jaroor likhen...

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  12. मेरे ख्याल से किसी अच्छी चीज़ को कहीं से निकाल के ज़्यादा लोगों में फैलाना और भी अच्छी बात है,अच्छी पोस्ट का चयन ...
    सुन्दर व्यंग..


    विकास पाण्डेय
    www.vicharokadarpan.blogspot.com

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