सोमवार, नवंबर 29, 2010

आज यही सही !!!!!

लबो पर उसके कभी बद्दुआ नहीं  होती
बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती

इस  तरह  मेरे गुनाहों को वो धो देती है,
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

अभी जिंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा,
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ  जाती है
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है

ए अँधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया,
माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया

मेरी ख्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊ
माँ से इस तरह लिप्टू कि बच्चा हो जाऊ

'मुनव्वर' माँ के आगे यूँ कभी खुलकर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती

लिपट जाता  हूँ माँ से और  मौसी मुस्कुराती है,
मैं उर्दू  में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी  मुस्कराती  है

मुनव्वर राणा 
 

16 टिप्‍पणियां:

  1. मुनव्वर राणा जी के ये अशार हम दोनों को बहुत प्रिय है, जितनी बार इन्हे पढॉ माँ से लिपट कर रोने का मन करता है। आज शाम हम दोनों जब अपनी माँ को फोन करेंगे, तुम्हे और मुनव्वर राणा दोनों को फिर से थैंक्स कहेंगे।

    सोनी बहन, उधर एक और माँ इंतज़ार में है! शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुनव्वर राना,कोलकाता और सोनी बिटिया! ये शेर न जाने कितनी दफा पढा है और जब भी पढा है रोया हूँ...
    .
    होंगे तेरे दामन में चाँद तारे तो होंगे ऐ फ़लक,
    मुझको मेरी माँ की मैली ओढनी अच्छी लगी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया ..और सार्थक पंक्तिया कही हैं आपने ...अरे आगे बढ़ो इतना अच्छा लिखते हो ... शब्द कम पड़ जायेंगे ...अगली प्रस्तुति का इन्तजार रहेगा
    कभी चलते -चलते पर मेरी गजलों पर गौर फरमाएगा ...शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुंदर. कुछ अलग तरह की कविता है ये.

    उत्तर देंहटाएं
  6. मुनव्वर राणा जी के अशआर हमेशा बहुत प्यारे होते हैं..

    उत्तर देंहटाएं
  7. bahut pyari rachna hai aapki..

    mere blog par bhi kabhi aaiye waqt nikal kar..
    Lyrics Mantra

    उत्तर देंहटाएं
  8. मकर संक्राति ,तिल संक्रांत ,ओणम,घुगुतिया , बिहू ,लोहड़ी ,पोंगल एवं पतंग पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं........

    उत्तर देंहटाएं
  9. मुनव्वर राणा जी के ग़ज़ल की बहुत ही खुबसूरत प्रस्तुति..... हर नज़्म बहुत कुछ कहती हुई....

    उत्तर देंहटाएं
  10. मुनव्वर राणा जी ने माँ के ऊपर बहुत ही ह्रदयस्पर्शी शेर लिखे हैं
    सभी दिल में उतर जाते हैं
    प्रस्तुति के लिए आपका आभार

    शुभ कामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  11. बढ़िया पढवाने के लिए आभार.
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

    उत्तर देंहटाएं