गुरुवार, मई 20, 2010

सोशल नेटवर्किंग साईट, फायदे का सौदा !!!!!

सोशल नेटवर्किंग साईट, एक ऐसा माध्यम जहां अनजाने भी अपने बन जाते है, और जहां जा कर कई बार हमारे अपने ही हमारे अनजाने बन जाते है ! ऐसा इसलिए क्योकि कई बार हम इन सोशल नेटवर्किंग साईट पर इतना वक़्त बिताते है कि हमें हमारे अपने नज़र ही नहीं आते ! ये साईट एक ऐसा जाल है जिसमे एक बार प्रवेश करने के बाद निकलना किसी को भी अच्छा नहीं लगता, और कुछ समय पहले तक तो ये सिर्फ आम लोगो में प्रचलित थी पर अब धीरे-धीरे ये आम लोगो से निकल कर खास लोगो के बीच प्रचलित होने लगी है और  इसके कई उधाहरण रोज़ देखने को मिल रहे है ! अभी कुछ ही दिन पहले कि बात है जब अमिताभ बच्चन जी ने ट्विटर ज्वाइन किया उससे पहले सचिन तेंदुलकर ने ! दोनों ने ही पहले ही दिन अपने कई फोलोअर बना लिए ! लेकिन इन सबसे भी बड़ी बात ये है कि अब आपकी और हमारी दिल्ली ट्रेफिक पुलिस भी ट्विटर और फेसबुक से जुड़ गई है ! जो हर पल कि ट्रेफिक अपडेट आपको देती रहती है, कहाँ जाम लगा है , कहाँ बस पलटी है, कहाँ ट्रेफिक डायवर्ट किया गया है , वगेरह-वगेरह ! हालाँकि उनकी ये सारी कसरत कॉमन वेल्थ गेम के लिए है लेकिन फिर भी लोगो को दिल्ली ट्रेफिक पुलिस से सीधे जुड़ने का ये तरीका बड़ा पसंद आ रहा है ! सभी अपनी परेशानियों का सीधे-सीधे हल दूंद रहे है ! किसी को जानना है की वो अपनी गाड़ी के शिशो पर कितने mm की फिल्म चद्वाए तो किसी को जानना है की वो आज किस रास्ते ना गुजरे सभी के जवाब भी कुछ ही देर में मिल रहे है ! लेकिन बेचारी दिल्ली ट्रेफिक पुलिस उसे ये पता नही की उसने किस ओखली में सर दिया है और शायद यही बताने के लिए  दिल्ली के कुछ समझदार लोग भी है जो ये जानना  चाह रहे ही अगर उन्होंने हेलमेट नहीं पहना तो "मामा जी" कितने में मानेंगे ! हालाँकि इसका कोई जवाब नहीं मिला जबकि जवाब तो इसका भी मिलना चाहिए था ! लगे हाथ मैंने भी पूछ डाला की क्या मैं यहाँ उन "मामो " के नाम ले सकती हूँ जिन्होंने बिना वजह हम लोगो से चदावा  लिया ! लेकिन इसका भी जवाब नहीं मिला बल्कि कुछ देर बाद देखा तो ये दोनों और इन जैसे और कमेन्ट डिलीट किए जा चुके थे ! ऐसी उमीद तो नहीं थी लेकिन हुआ ऐसा ही  !
लेकिन अगर दिल्ली ट्रेफिक पुलिस खुद को मिलने वाले सभी कमेन्ट को गभीरता से तो कॉमन वेल्थ गेम तक पूरी व्यवस्था ही सुधर जाएगी, लेकिन ये " दिल्ली ट्रेफिक पुलिस" है जो हमेशा हमारे साथ रहने के स्लोगन तो लिख सकती है पर उसे निभा नहीं सकती !
खैर ये बात तो रही दिल्ली ट्रैक पुलिस की, लेकिन अगर सोच कर देखा जाए तो इस तरह की शुरुवात अगर सभी सरकारी विभाग कर दे तो हमारी सरकारी व्यवस्था काफी हद तक सुधर सकती है ! लोग सीधे तौर पर अपनी शिकायते सम्बंधित विभाग के पास पंहुचा सकते है ! जिसका सीधा लाभ लोगो तक पहुच सकेगा  और तब शायद ये भ्रष्ट होती सरकार कुछ हद तक सुधर सके ! आज तरह-तरह लोग इन साइट्स  से जुड़ कर सीधे लोगो से संपर्क साध रहे है ! अभी कुछ दिन पहले ही बाबा राम देव के राजनीति में आने की चर्चा के बाद बाबा रामदेव को लेकर कई तरह की बाते की जाने लगी कई तरह के प्रश्न  किए जाने लगे और उन सभी प्रश्नों का जवाब बाबा रामदेव ने प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के साथ-साथ सीधे ही अपने सोशल नेटवर्किंग अकाउंट पर देना शुरू किया ! जिससे लोगो को उन्हें सीधे तौर पर समझने में मदद मिली ! अगर ऐसी ही पहल आज हर राजनितिक पार्टी कर दे तो पार्टी के आलाकमान को  अपने ही कार्य्कर्तऔ के उलजलूल बयानों और उटपटांग हरकतों की वजह से शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा ! और इससे सीधे-सीधे उस पार्टी को यह भी पता चल जायेगा की किस जगह उसकी पार्टी कितनी प्रगति कर रही है ! तब कोई भी पार्टी यह नहीं कह सकेगी की वो  काम तो कर रही लेकिन कुछ लोगो की वजह से उनका किया काम सफल नहीं हो पा रहा !
शशि थरूर के मामले में अभी पिछले दिनों जो भी हुआ वो सभी ने देखा और उस पूरे मामले में ट्विटर ने एक अहम्  भूमिका निभाई ! बेशक ललित मोदी की एक ट्विट ने पूरा हंगामा खड़ा किया लेकिन उस एक ट्विट से काफी बड़ा खुलासा हो गया ! जो शायद नहीं हो पता अगर दोनों ही दिग्गज उस सोशल नेटवर्किंग साईट से ना जुड़े होते ! हालाँकि इस मामले के बाद सभी नेता इस तरह की साईट से तौबा कर चुके हो लेकिन मेरा तो मानना यही है की हमारे सभी राजनेताओ  को इस तरह की सोशल नेटवर्किंग साईट से जुड़ना चाहिए ! ताकि लोग तब सीधे ही उनसे सवाल जवाब कर सके !
अगर ऐसा होता है तो ये आने वाले समय में हमारे देश के लिए बहुत ही अच्छा प्रयोग होगा जिससे ना सिर्फ देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल सकेगी बल्कि आम जानता भी सही मायनो में अपने चहेतों को परख भी सकेगी !

9 टिप्‍पणियां:

  1. auchhi mishaal aur udahran hai .kuch fayda kuch nuksaan bhi hai .
    so hmm to aadi hai blog k wo to hrdm rahenge.
    nameshkar ,
    soni ji
    post k liye badhaiyan

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  2. "बढ़िया पोस्ट, अधिकतर लोगों के लिये तकनीक फायदेमन्द है जबकि कुछ के लिये सरदर्द..."

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  3. आपके पोस्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे अनूठे होते हैं.. आपका एप्रोच भी इस अनूठेपन को चार चाँद लगा देता है...अच्छी अनालिसिस..मैं खुद भी काफी लंबे समय तक ऐसी साईट पर रहा ..पर बोर हो गया.. अमित जी और सचिन के वैसे ही करोड़ों चाहने वाले हैं..सवाल यह है कि क्या वे भी उन करोड़ों चाहने वालों से जुड पाते हैं ?? शायद नहीं..अमित जी के ब्लॉग पर मैंने कई बार कुछ सवाल पूछे जो न व्याक्तिगत थे न सामान्य..बल्कि उनकी छिपी प्रतिभा से सम्बंधित थे जो शायद किसी को न पता हो या बहुत कम लोग जानते हों..पर जवाब न आया..मैंने बंद कर दिया..मुझे सोनी गर्ग के प्रश्न और उनके ब्लॉग पर जाना अच्छा लगता है..कम से कम संवाद का माहौल तो बनाता है.. दीवारों से बतियाना किसे पसंद होगा!!

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  4. सबसे पहिले त हमरा बेस्ती करने के लिए हमसे माफी माँगो… अरे!! बिटिया का घर कभी गरीबखाना नहीं होता है… हम त बहुत दिन बंगाल में रहे हैं, जहाँ बिटिया को माँ कहते हैं.. इसलिए लगाओ कान को हाथ कि कभी ई गरीबखाना वाला डाइलॉग हमसे नहीं बोलोगी...
    बहुत मन लगाकर लिखती हो, भगवान करे ऐसहीं लिखती रहो!! जियो!!!

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  5. @चला बिहारी ब्लोगर बनने
    लीजिये पकड़ लिए अपने कान अब कभी ऐसी गलती दोबारा नहीं करेंगे अब माफ़ कर दीजिये !

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  6. सोशल नेटवर्किंग साइट्स के फ़ायदे तो हैं पर अभी तक देश की जनता के बहुत बड़े भाग से दूर हैं, ये साइट्स. आशा करनी चाहिए कि शिक्षा, इंटरनेट की पहुंच व कंप्यूटर की बढ़ती पैठ के चलते इसमें आशातीत वृद्धी होगी.

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