
ये है रेहान भाई जो सिटी प्लाज़ा मार्केट, सेक्टर 62 नॉएडा में अपनी चलती फिरती दुकान के साथ दोपहर एक बजे पहुँच जाते है ! इन्हें यहाँ अपनी इस चलती फिरती दुकान को लगाते हुए तकरीबन छ से सात साल हो गए ! इनकी दुकान पर मिलने वाली चिकन बिरयानी के सभी कायल है और यहीं वजह है की दुकान लगने के लगभग छ घंटे के अन्दर ही रोज़ बना कर लायी हुई इनकी कई किलो बिरयानी हाथो-हाथ बिक जाती है ! 35 रूपए हाफ प्लेट का मूल्य भी लगभग सभी की जेबों को सूट करता है ! लेकिन अब ये रेहान भाई पिछले कुछ दिनों से अपनी दुकानदारी से खुश नहीं है और वजह भी बड़ी अनोखी है ! चलिए वजह जानने से पहले एक नज़र इनके स्टाइल पर डाल ली जाये !

अब इनका स्टाइल देख कर कोई सेलेब्रेटी तो याद आ ही गया होगा और अगर अब भी याद नहीं आया तो अब इस अगली तस्वीर को देख कर आपको समझ आ ही जायेगा की ये किसके स्टाइल की कोपी है !

जी हाँ, ये हिमेश रेशमिया की ही कोपी है ! लेकिन यहाँ बात सिर्फ स्टाइल कॉपी करने की नहीं है बात थोड़ी बड़ी है ! दरअसल ये रेहान भाई पिछले पाँच सालो से हिमेश रेशमिया का स्टाइल फोलो करते आ रहे है ! ड्रेस से लेकर टोपी तक सब कुछ, बहुत बड़े फैन है हिमेश रेशमिया के ! लेकिन आजकल थोड़े दुखी है और दुखी होने की वजह ये है की इनकी बिरयानी की बिक्री पहले के मुकाबले थोड़ी कम हो गई है ! अब इसकी कई वजह हो सकती है, लेकिन रेहान भाई अपनी बिरयानी की बिक्री कम होने की सिर्फ एक वजह मानते है और इनके अनुसार वो वजह है हिमेश रेशमिया का अब टोपी ना पहनना ! सुन कर हैरानी हुई कि हिमेश रेशमिया के टोपी ना पहनने से इनकी बिक्री का क्या लेना देना ????
लेकिन रेहान भाई तो यहीं मानते है की जबसे हिमेश रेशमिया ने अपनी टोपी उतारी है तब से ही इनकी बिरयानी की बिक्री कम हुई है और अब ये चाहते है की हिमेश रेशमिया फिर से टोपी पहनना शुरू कर दे ! वैसे कुछ समय पहले तक हिमेश रेशमिया भी अपनी टोपी को अपने लिए लकी मानते थे और अपनी ये टोपी वो म्यूजिकल शो "सारेगामापा" के कंटेस्टेंट विनीत को भी पहना चुके थे ! अब इस टोपी ने इन दोनों कि कितनी किस्मत बदली ये तो वही जाने लेकिन हमारे रेहान भाई तो पूरी तरह से इस टोपी को ही अपनी किस्मत मान चुके है ! मेरे लिए तो ये किसी अन्धविश्वास से कम नहीं है !
अब जबसे हिमेश रेशमिया ने टोपी पहनना छोड़ दिया है तब से रेहान भाई बड़े दुखी है ! लेकिन अब इन्हें कौन समझाए कि जो टोपी इनके स्टाइल आइकॉन हिमेश रेशमिया कि किस्मत नहीं बदल सकी वो इनकी बिरयानी कैसे बिकवायगी ! तो जाइये आप भी मिल कर आईये इन रेहान भाई उर्फ़ हिमेश रेशमिया के डुप्लिकेट से और लुत्फ़ उठाइए इनकी चिकन बिरयानी का शायद तब बिक्री थोड़ी ज्यादा हो जाये और इन्हें ये ज्ञात हो जाये, कि किसी और के टोपी पहनने या ना पहनने से इनकी दुकानदारी पर असर नहीं पढता !
ये सभी तस्वीरे मेरे मित्र और इन्ही की बिरयानी के शौक़ीन प्रदीप लांबा द्वारा ली गई है !

Maza aayaa Paul aur Rehan Bhai ki Biryani ki kahani sun kar..... aur munh mein paani bhi.
जवाब देंहटाएं;-)
asafalata bade bhram paida kar detee hai man me.......
जवाब देंहटाएंbhavishy kee kokh me kya hai...? ye to aam aadmee kee kamzoree hai vo duniya ke kisee bhee koune me kyo na basata ho.......
Interesting post .
अजब गजब अंधविश्वास !!
जवाब देंहटाएं@ Apanatva
जवाब देंहटाएंमुझे ये जान कर ख़ुशी हुई कि आपने अपना खाली समय मेरे ब्लॉग पर खर्च किया और सबसे ज्यादा खुशी इस बात कि है कि आज आपने मेरी सबसे पहली पोस्ट पढ़ी भी और उस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी ! आपने अब तक मेरी उन दोनों पोस्ट पर कमेन्ट किए है जिसे किसी ने यहाँ नहीं पढ़ा ! हाँ, जागरण जक्शन पर मेरी पोस्ट "अपने लड्डू का भाव तुम बताओ" एक बड़ी हिट साबित हुई थी लेकिन गलती से आपकी मेरी इस पोस्ट पर दी गई प्रतिक्रिया डिलीट हो गई ! लेकिन मन में वो हमेशा रहेगी ! बस आपका स्नेह और आशीर्वाद यूही बना रहे इसकी कामना करुँगी !
धन्यवाद !
अब लुप्त हो चुकी एक पत्रिका “सारिका” में एक लघुकथा पढी थी. मुम्बई के अंधेरी स्टेशन पर एक औरत एक भिखारी को आदतन हर रोज़ कुछ पैसे देती थी. एक रोज़ खुल्ले पैसे न होने के कारण बिना दिए आगे बढ गई और अगले दिन से भीख न देना उसकी आदत में शुमार हो गया. दो दिन बाद जब वो बिना पैसे दिए आगे बढी तो उस भिखारी ने पीछे से आवाज़ लगाई, “दो दिन से कुछ नहीं दिया तुमने. दस पैसा ही दे दो माँ!” वो ग़ुस्से में पलटी, “पीछे से आवाज़ देता है और दो दिन से नहीं दियामतलब क्या मैंने कर्ज़ लिया है तुझसे.” भिखारी बेचारा सकपका गया. डरता हुआ बोला, “तुम बोनी करती हो माँ, तो सारा दिन पैसा मिलता है. दो दिन से तुमने कुछ नहीं दिया तो खाने भर के पैसे नहीं मिले.” उस औरत ने पर्स में हाथ डाला और जितने पैसे थे सब उसकी झोली में डाल दिए.
जवाब देंहटाएंअंधविश्वास में भी सिर्फ ढाई अक्षर अंध के हैं, बाक़ी के साढे तीन तो विश्वास के ही हैं.
अच्छा बिस्लेसन है... बहुत साल पहिले एगो सिनेमा आया था जादू टोना, उसमें सुरुए में एक लाईन अंगरेजी में लिखा था, जिनको बिस्वास है उनके लिए कोनो सबूत का जरूरत नहीं अऊर जिनको बिस्वास नहीं है उनके लिए कोनो सबूत काफी नहीं.
जवाब देंहटाएंएगो पोस्ट हम भी लिखे थे खूबसूरत अंधबिस्वास… ऊ सच्चाई पर आधारित था...
http://chalaabihari.blogspot.com/2010/05/blog-post_13.html
मैं आशा करता हूँ की आपका ये ब्लॉग मेरे बिरयानी मास्टर को ज़रूर नामे और फमे दिलवाएंगे. और हाँ मैं आप सभी लोगों को से निवेदन करूंगा की जो व्यक्ति नॉन-वेग हो वोह ये बिरयानी का ज़रूर टेस्ट ले और अपने दिल से पूछ कर बताये की मेरे शब्दों में कहीं हेर-फेर तोह नहीं है ना. और मैं भगवन से उनकी बरकत के लिए दुआ करूंगा.
जवाब देंहटाएंऔर हाँ सोनी गर्ग जी, आपका नाम और आपके ब्लोग्स की बदोलत कई लोगों की बरकत बढ़ जाएगी क्योंकि सभी लोग रेहान भाई उर्फ़ हिमेश रेशमिया की बिरयानी के कायल जो हो गए हैं.
आपका बहुत बहुत धन्यवाद् |
mai mahsoos hee nahee kar paee kee spashtta nahee hai....
जवाब देंहटाएंaapke comment ke baad bhoomika dalee hai.....pad kar batana jaroor...... all the best.
"इस दुनिया में विश्वास के अलावा और कोई सहारा नहीं है...."
जवाब देंहटाएंshaandaar ye huiiiiiiiiiiiii na baat
जवाब देंहटाएंhmmko bhi koi lucky topi dila do bahut jaruri haiiiiiiiiiiiiiiiiii
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