बुधवार, जुलाई 14, 2010

अच्छा, महंगा, अस्तव्यस्त, और डूबता हुआ .........आपका और हमारा शहर "दिल्ली" !!!!

कुछ दिन पहले अखबारों में कुछ सर्वे छपे थे जो दिल्ली को लेकर थे और वो इस तरह थे !

  1.  दिल्ली देश का रहने लायक सबसे अच्छा और नंबर वन शहर है !
  2. एक न्यूज़ चैनल के अनुसार दिल्ली देश का सबसे महंगा शहर है !
  3. एक अन्य सर्वे के अनुसार  दिल्ली, ट्रैफिक अस्तव्यस्तता के मामले में दुनिया का पांचवा शहर है !
  4. एक अन्य सर्वे के अनुसार देश में आने वाले सभी विदेशी टूरिस्ट्स में से 67 % लोगो के अनुसार दिल्ली एक असुरक्षित शहर है !
 इन सभी सर्वे में कितनी सच्चाई है ये तो पता नहीं,  लेकिन अगर ये ज़रा भी सच है तो सोचने वाली बात ये है कि जिस शहर को देश का सबसे अच्छा और रहने लायक शहर कहा जा रहा है क्या  वास्तव में ऐसा है ??? दो दिन पहले हुई बारिश ने गेम्स के लिए आधी से ज्यादा उधडी हुई दिल्ली को तालाब में तब्दील कर दिया ! आज आलम ये है की बारिश ख़त्म हो जाने के बाद भी कई इलाके जलमग्न  हैं और हमेशा की ही तरह दिल्ली सरकार और एमसीडी ने आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू कर दिया और ये सिलसिला भी हमेशा की तरह बारिश ख़त्म होने के साथ-साथ ख़त्म हो जायेगा !
सर्वे में दिल्ली को सबसे अच्छा शहर कहने का आधार था यहाँ का रहन-सहन, हेल्थ और एजुकेशन ! इन आधारों पर दिल्ली को सर्वश्रेष्ट स्थान ???? ये वाकई हैरान कर देने वाली बात क्योकि इस  शहर में फोन करने पर पिज्जा तो 30 मिनिट में आपके घर पहुँच जायेगा लेकिन अम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और दिल्ली पुलिस जैसी सुविधाए 30 मिनिट में आपके घर पहुँच जाये इस बात की  गारंटी नहीं ! लेकिन वी.आई.पी. इलाकों में ये सुविधाए 30 मिनिट से पहले भी पहुँच सकती है तो हुआ ना ये शहर रहने लायक अब सभी लोग वी.आई.पी. इलाकों में नहीं रहते तो इसमें बेचारे सर्वे करने वालो की क्या गलती !  अब अगर हेल्थ की बात करे तो दिल्ली में सभी तरह चिकित्सीय सुविधाए मौजूद  है लेकिन यहाँ भी बात आती है की ये सब किसके लिए है, अब सभी तो प्राइवेट अस्पताल का खर्च उठाने में समर्थ हो नहीं सकते और जो सरकारी अस्पताल में शरण लेते है वो ज्यदातर भगवान् भरोसे ही जीते है और अगर एजुकेशन की बात की जाये तो जहां आपको कार लोन दो दिन में मिल सकता है वहीँ आपको एजुकेशन लोन के लिए दो हफ्ते से भी ज्यादा का इन्जार करना पढ़ सकता है ! अब बैंको के अनुसार देश की राजधानी में एजुकेशन ज़रूरी हो या ना हो लेकिन कार होना ज़रूरी है ! अब देश के सबसे अच्छे शहर में रहने के लिए कुछ तो स्टेटस होना ही चाहिए !
अब दूसरे सर्वे के अनुसार दिल्ली देश का सबसे महंगा शहर है ! ये सर्वे तो झूठ हो ही नहीं सकता ! अभी कल ही ही बात है मैंने टोमेटो सूप पीने की इच्छा जाहिर की लेकिन पता लगा की टमाटर 50 रूपये किलो हो गए है ! कीमत सुन कर मैंने इंस्टेंट मेक सूप से ही काम चलाया ! टमाटर, जो की हर सब्जी की जान है वो अगर इतना महंगा है तो बाकी सब्जियों का क्या ??? सब्जियों के अलावा रोज़मर्रा की ज़रुरतो में काम आने वाली सभी चीजों की कीमते आज आसमान में छलांगे लगा रही है तो कैसे नहीं होगा ये देश का सबसे महंगा शहर, बिलकुल होगा !
तीसरे सर्वे में दिल्ली को ट्रेफिक अस्तव्यस्तता के मामले में विश्व में पांचवा स्थान प्राप्त हुआ है ! यह  जान कर  ख़ुशी हुई खुशी इसलिए की शुक्र है आज विश्व में दिल्ली से भी ज्यादा ट्रेफिक ट्रबल वाले शहर है लेकिन वास्तव में इस सर्वे पर यकीं नहीं हो रहा ! लेकिन अगर यही हालत रही तो कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान पूरे भारत  का प्रतिनिधित्व करने वाली दिल्ली गेम्स में इस ट्रैफिक ट्रबल से अपनी इज्ज़त बचा पायेगी ??? क्या तब  सडको पर पदने वाला अतिरिक्त भार दिल्ली ढो पायेगी ???
अब बात उन विदेशी सैलानियों की जिन्होंने दिल्ली को एक असुरक्षित शहर का तमगा दिया ! कुछ दिन पहले ट्विटर पर मंदिरा बेदी की ट्वीट पढ़ी थी जो शायद इसी सर्वे को लेकर लिखी गई थी जिसके अनुसार "दिल्ली, लडकियों के लिए मुंबई से ज्यादा असुरक्षित है !" वास्तव में अगर दिल्ली में लडकियों की सुरक्षा की बात की जाये तो दिल्ली में अब भी लडकियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार नहीं हुआ है ! अक्सर भीड़ में छूने की कोशिश में निकलता किसी पागल जानवर का हाथ, चौक-चौराहों पर घूरती  हुई नज़रें, उलजलूल फब्तियां इस बात का सबूत है कि दिल्ली में आज भी एक अकेली लड़की दिल्ली के मर्दों की टेढ़ी नज़र का कारण है ! क्या इस माहौल  में विदेशी युवतियां खुद को सुरक्षित रख पाएंगी ??? क्या सभी विदेशी सैलानी गेम्स का आनंद निर्भय हो कर ले पाएंगे ???
आज दिल्ली को हर तरफ से सजाने की कोशिश की जा रही है ! कल ही पढ़ा था की अ़ब जगह-जगह सडको को गन्दा करने वालो पर डबल फाईन लगेगा ! लेकिन क्या ये फाईन लोगो को बदल सकेगा ??? क्या दिल्ली सरकार सडको के साथ-साथ लोगो के दिमाग भी चमका सकेगी, जिनमे अपने देश की इज्ज़त को लेकर कोई जागरूकता नहीं है ! क्या सिर्फ टैक्सी, ऑटो वालो को अंग्रेजी भाषा सीखा देने भर से उनके रवैये में सुधार हो सकेगा ??? डर है की उस वक़्त अखबारों में गेम्स से ज्यादा चर्चा विदेशी सैलानियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की ना हो ! जिस गेम्स से सरकार और जनता ये उम्मीद लगाये हुए है की भारत को इससे एक ऊँचा आयाम मिलेगा, भारत का विदेशी व्यापार बढेगा, या विश्व पटल पर भारत की मांग  बढेगी, इश्वर ना करे की उस गेम्स के बाद ये नज़ारा उल्टा हो !

22 टिप्‍पणियां:

  1. दिल्ली यानि इस देश का दिल जिसे कोंग्रेस पार्टी के सरकार ने कोमनवेल्थ गेम के नाम पर पूरी तरह सड़ा दिया है और जिस देश का दिल सड़ गया हो उस देश में इंसानियत जिन्दा कैसे रह सकता है ? रही बात चेनलों की तो सबको पता है की पैसे के लिए ये लंगरे को भी सबसे तेज दौरने वाला कहकर प्रचारित कर सकतें हैं इनका वास्ता पैसों से है सच्चाई जाये भाड़ में ...| दिल्ली के प्रशासन के भ्रष्टाचार ने देश के अन्य राज्यों में भ्रष्टाचार को बढ़ाने में प्रेरक तत्व के रूप में काम किया है ,खासकर कोमनवेल्थ गेम के निर्माण कार्यों और DTC के बसों के खरीद में हुए भ्रष्टाचार ने तो बेशर्मी की साडी हदें पार कर ली है ....| देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाक के निचे इस तरह का भ्रष्टाचार देश के आने वाले भविष्य की कहानी कह रहा है |

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  2. soni ji,,aapka likha bahut achha laga,, main naya blogger hun plz padhkar,, suggestion den----sproutsk.blogspot.com

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  3. आपका अंदाजे बयां रोचक है। वैसे और कुछ हो न हो, दिल्ली तो सच ही रही है।

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  4. इतिहास वैसे तो कभी नहीं पढा, लेकिन इतना याद है कि दुनिया की सारी समृद्ध सभ्यताएँ नदी घाटी के किनारे पनपी थीं, चाहे सिंधु घाटी की सभ्यता हो या नील नदी की सभ्यता. फिर जब तक हमारे देश की नदियाँ स्वच्छ थीं, सब कुछ पवित्र था. जहाँ जहाँ नदियाँ दूषित हुई हैं, वहाँ वहाँ असभ्यता ने पदार्पण किया है... लिहजा आपने जितना कुछ लिखा है वो सब सच है, जहाँ जमुना की छाती पर सीमेंट की कॉलोनी बनी हो, और जमुना से नाले से भी बदतर सड़ाँध आती हो, वहाँ सब कुछ किस स्तर पर होगा कहने की आवश्यकता नहीं है… अभी गेम्स के पहले और पूरी बारिश आने के बाद देखिएगा एम सी डी और दिल्ली सरकार के मध्य चलने वाला वॉली बॉल का गेम, जो समस्याओं की गेंद से खेला जाएगा और नतीजा भी बता दूँ… ये मैच ड्रा होगा...

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  5. एकदम सही हाल बयान कियाहुआ है दिल्ली का... एगो मिडिल क्लास अदमी का घर में जब मेहमान आने वाला होता है, त सब फालतू सामान पलंग के नीचे डाल देता है लोग, घर का पुराना अस्त ब्यस्त आलमारी पुराना चद्दर से तोप दिया जाता है, अऊर अगल बगल से माँग कर कुछ नया समान सजा देता है...बस ओही हाल है अपना दिल्ली का… कनॉट प्लेस में 9 जगह खुदाई हुआ है अऊर सरकारी घोसना है कि खाली तीने गो सब वे बन पाएगा... आस पास का ऑफिस का फोन लाईन त कब्बे से खराब है, बरसात होने से अऊर झमेला हो गया है... दिल्ली में त अब लगता है कि बरसात का पानी निकलता नहीं है भाप बनकर उड़ता है... सर्वे उर्वे का बात त हम नहींजानते हैं, लेकिन हालत ठीक नहीं है... हर तरफ दिल्ली में “खुदा” है, इसलिए दिल्ली का भगवान मालिक है!!

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  6. क्या सोनी। कभी तो खुस रहा करो। अपने देश की राजधानी है। सारे देश का प्रतिनिधित्व करती है। दो सबसे ज्यादा ट्रैफिक, भष्ट्राचार, सबसे ज्यादा आबादी, सबसे ज्यादा हरियाली, रहने का सबसे अच्छा शहर जैसी जितनी भी प्रतियोगिताएं हैं आखिर सबमें एक साथ प्रविष्टी पाना आसान नहीं है। यह कम बड़ी उपलब्धि है क्या। खुदाई करने से बंजर भूमि उपजाउ होती है, यही सोच कर पूरी दिल्ली खोद डाली भाई लोगो ने। अब क्या निकलेगा ये तो नहीं मालूम, पर हां कुछ लोग जरुर अंदर जाएंगे नहीं तो बसें, कार, ट्रक और स्कूटर तो हैं ही खुदे गड्डों में जाने के लिए। अब चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी. सरकार किसी की हो, दिल्ली में सारे देश का रुप दिखाई देना चाहिए उसी सपने को साकार करने में लगे रहते हैं दिल्ली को चलाने वाले। सारी हर्डल रेस अगर हमारे खिलाड़ी नही जीत पाए तो जान लेना कि खिलाड़ी खेलना चाहते ही नहीं। दिल्ली की सड़को पर हर्डल रेस की तैयारी करने का अब भी समय है। पर खिलाड़ी सरकार की सद्इच्छा को समझे तब न.....

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  7. आपका आगमन अच्छा लगा
    चलिए जो होता है शायद ठीक ही होता है.
    यदि आप ब्लाग पर न आती तो शायद मैं एक अच्छी जानकारी से वंचित रह जाता जो आपने दिल्ली के बारे में दी है.
    हम लोग बहुत छोटे से शहर के रहवासी है. इसलिए दिल्ली हमें हमेशा डराती रही है.
    कहा जाता है कि दिल्ली दिल वालों का शहर है लेकिन एक फिल्म भी आई थी दिल्ली का ठग..
    और फिर देश की धड़कन समझे जाने वाली दिल्ली में जो कुछ हर रोज घटता है वह भी परेशान करता है.
    आप खतरनाक शहर में बेहद सुकून के साथ रहे यही शुभकामनाएं हैं.
    एक निवेदन और है.. और वह यह कि आपका प्रोत्साहन इस छोटे से लेखक को मिलता रहेगा ऐसी उम्मीद है.

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  8. समयोपयोगी तथा तर्कसंगत लेख के लिए बधाई !

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  9. मेरे इस लेख को पसंद करने के लिए आप सभी का धन्यवाद ............
    इस लेख में मुझसे एक भूल हुई जिसका सुधार ज़रूरी है दरअसल चौथे नंबर पर दी गई सर्वे की रिपोर्ट में मैंने कहा की ये विदेशी टूरिस्ट्स पर करवाया गया था लेकिन आज ही जब दुबारा इसके आंकड़े देखे तब ज्ञात हुआ की ये सर्वे विदेशी टूरिस्ट्स पर नहीं बल्कि दिल्ली की ही महिलाऔ पर करवाया गया था और ये सर्वे महिला व् बाल विकास विभाग, एनजीओ जागोरी, यूएन हेबिटेट और यूनाइटेड नेशंस डेवलेपमेंट फंड फॉर वुमेन द्वारा करवाया गया था !
    सर्वे विदेशी टूरिस्ट्स पर भी करवाया गया था लेकिन अभी उसके आंकड़े मुझे ज्ञात नहीं है, ज्ञात होते ही बताने की कोशिश करुँगी !
    धन्यवाद !

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  10. दिल्ली 1982 से मैं भी लगातार आ रहा हूँ।
    और दिल्ली देखी भी है, देख भी रहा हूँ।
    ठगी तो सभी शहरों में होती है,कहीं ज्यादा कहीं कम।
    सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
    सुरक्षा व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखनी चाहिए
    जिससे कोई भी किसी अपराधी का शिकार न बने।

    अच्छी पोस्ट है।

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  11. सोनी, ये आप दिल्ली का हाल बता रही है जबकि देश मे सभी तरफ यही हालात है ... असल मे अब जब पानी सिर से उपर उठ गया है.. समय आ गया है कि सरकार पर दोष लगाने के बजाय जब हम जनता को ही जागना होगा .. अपनी वोटो का सोच समझ कर इस्तेमाल करना होगा ... ताकि ऐसी भयावह स्थिति दुबारा ना बने ..

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  12. informative post.........
    ye aankde kitne vishvsneey hote hai ye aap acche se jantee hongee .........

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  13. सोनी जी बात तो सोलह आन्ने खरि कही है आपने लेकिन ये सभी प्रशन तो खेलो के समय अपना उत्तर खोज पायेंगे अभी तो इसका जवाब खोजना है कि

    क्या दिल्ली मे खेल हो पायेंगे?

    क्या शीला सरकार अपने दावो पर खरा उतर पायेगी?

    क्या दिल्ली खेलो के आयोजन के लिये तैयार हो पायेगी?

    हमारी दिल्ली, आपकी दिल्ली, हम सब की दिल्ली जिसने कॉमन वेल्थ खेलो के लिए देश के सबसे महंगे राज्य होने का सम्मान प्राप्त किया, क्या वो दिल्ली अपने नागरिको के लिये कमाई के भी उतने ही अवसर ला पायेगी?

    www.mitradaadda.blogspot.com

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  14. आपने मेरे मन की सारी बातें कह दी. शुक्रिया

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  15. आपकी चिंता वाजिब है जी.......
    दिल्ली के हाल देखकर वाकई सोचना पड़ता है कि इस देश की राजधानी का यह हाल है तो बाकि शहरों की तो.............. और हां दिल्ली में ही क्या किसी भी जगह पुलिस, फायर बिग्रेड और जरूरी सेवाएं ३० मिनट में नहीं आ सकतीं लेकिन वहीं पिज्जा ३० मिनट में आ जाएगा तो सोच लीजिए..........

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  16. Delhi kaa haale bayan aapne sateek prastut kiya hai... jab bhi Delhi jaati hun sach mein kis tarah se log rahte hai use dekh lagat nahi ki ye raajdhani hogi.... Train se jaate hi nizaamuddin se pahel jab train signal ke liye rukti hai to Delhi de ek Vastvik Tasveer dikhti hai jo dusare chhor par bhi waise hi dikhti hai...
    Saarthak chinta aur lekhan ke liye haardik shubhkamnayne

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