शनिवार, जुलाई 15, 2017

उसकी कहानी (भाग -3 )

शाम 7 बजे
अच्छा विवेक अब मैं जाती हूँ वैसे भी बहुत देर हो गयी !
सोनल, थोड़ी देर और रुको ना वैसे भी मम्मा अभी नहीं आएँगी वो जब भी पार्टी जाती है तो देर से ही आती है !(सोनल, विवेक की ही सोसायटी में रहती है !)
और अंकल ??
अरे यार पापा तो आते ही लेट है !
और शशांक भईया ??
अरे आज वो भी अपने फ्रेंड्स के साथ बाहर गए है पता नहीं कब आएंगे !
ओके, लेकिन मेरी मम्मा आने वाली होंगी ना, इसलिए उनके घर पहुँचने से पहले मुझे जाना होगा !
ओह्ह,,, ठीक है लेकिन नेक्स्ट कब आओगी ???
जब तुम फ्री हो !! (हँसते हुए )
ओके चलो बाय !
सोनल को बाहर तक छोड़ने जाता है फिर वापस आकर दरवाजा बंद करके टीवी के सामने बैठ जाता है ! थोड़ी देर बाद डोर बेल बजती है ! विवेक दरवाजा खोलता है ! सामने उसकी मम्मा थी !
अरे आप आ गए !
हाँ, आज थोड़ा देर तक चली पार्टी ! मेड काम कर गयी ??
नहीं, आयी नहीं आज वो !!
तूने मुझे फोन करके क्यों नहीं बताया ??और शशांक कहाँ है घर में नहीं है वो ??
अरे मैं आज सो गया था और भईया भी आपके जाने के बाद ही चले गए थे !
कहाँ गया वो ??
पता नहीं कुछ फ्रेंड्स आये थे उनके, उन्ही के साथ गए !
ठीक है !! अच्छा सुन आज खाना बाहर से ही आर्डर कर ले सबके लिए , मैं बहुत थक गयी हूँ !!
ठीक है !!
और  शशांक को भी फोन करके पूछ ले कब तक आयेगा ??
ओके मम्मा !!
....................................................
रात करीब 9 बजे......
डोर बेल बजी !
उसने दरवाजा खोला, देखा शशांक खड़ा था
अरे, कहाँ था तू ??
अरे वो दोस्त के घर गया  था कुछ काम था !!
क्या काम था ??
कुछ ख़ास नहीं बस वैसे ही कुछ था !
पता नहीं समझ नहीं आते तेरे काम भी !
अच्छा खाना क्या बना है !
आज बाहर से मंगाया है !!
अरे यार परसो भी बाहर से मंगाया था !! क्या मम्मा, बनाया क्यों नहीं कुछ !!
मैं बस थक गयी थी, आज खा ले कल बना दूंगी !!
इसी बीच पुरुषोत्तम भी आता है और सभी खाना खाकर सो जाते है !
...................................................
रात करीब 2 बजे शशांक का फोन बजता है !
उधर से आवाज आती है
कहाँ है शशांक आया नहीं अभी तक !
हाँ बस 15 मिनट में आ रहा हूँ तू मेरा गेट पर ही वेट कर  !
ठीक है मैं यही खड़ा हूँ तू जल्दी आ !
शशांक चुप-चाप घर के बाहर चला जाता है !!!
.......
अरे यार कितनी देर लगाता है तू !!
हाँ, अब आ गया ना, अच्छा सामान लाया है ना तू !!
हाँ, लाया हूँ अब चल जल्दी कर !
.....................................
शशांक करीब साढ़े तीन बजे घर वापस आता है वो दूसरी चाबी से गेट खोलता है और वापस अपने कमरे में जाकर सो जाता है !
तभी घर का लैंडलाईन फोन बजता है !! शशांक घबरा जाता है !!
फोन शशांक की मम्मा उठाती है ! फोन नंदिनी के हॉस्टल से है !!
नंदिनी के पेरेंट्स को फ़ौरन हॉस्टल में बुलाया गया है !!
to be continued .........

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया तरीके से आपकी कहानी आगे बढ रही है, अब आगे केख भागों में ही पता चलेगा कि क्या होगा? थोडा सस्पेंस बन गया है.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "सात साल पहले भारतीय मुद्रा को मिला था " ₹ " “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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