मंगलवार, जुलाई 16, 2019

इश्क़ में लड़किया पागल होती है, प्रैक्टिकल नहीं !!!

"प्यार कब कहां किसी का पूरा होता है
 प्यार का तो पहला अक्षर ही अधूरा होता है" 
बस इन्हीं दो लाइनों में प्रेम के प्रतिरोध का सार छुपा है लेकिन सिर्फ उन लोगों के लिए जिनका प्रेम उनकी मंजिल तक नहीं पहुंचा, बाकी उन लोगों के लिए तो यह सिर्फ 2 लाइनें हैं जिन्होंने पहले प्यार  किया और फिर  एक सफल शादी भी की ! ऐसे बहुत से जोड़े आगे चलकर कई युवाओं के मार्गदर्शक बनते  तो कुछ युवाओं की हिम्मत और बस ऐसे ही यह चेन  बढ़ती जाती है लेकिन कई बार इस बढ़ती हुई चेन में कुछ ऐसी कड़ियां भी जुड़ जाती हैं जिनमें बहुत जल्दी जंग लग जाती है और वो कड़ी पूरी चेन  के लिए थोड़ी अपमानजनक भी  साबित होती है !  असल में इस प्रेम विवाह की चेन  में जुड़ना बहुत आसान नहीं तो बहुत मुश्किल भी नहीं है लेकिन प्रॉब्लम तब आती है जब पीयर प्रेशर के चलते या किसी दिखावे के चलते या अपनी नासमझी के चलते इस प्रेम विवाह की चेन में जबरदस्ती घुसा जाए !!
नेहा, दिल्ली शहर में रहने वाली एक 24 साल की लड़की जिसको अचानक से एक लड़के से प्यार हो जाता है लड़का छोटी जात का और लड़की बड़ी जात की, लड़की एक मशहूर रईस परिवार की बेटी और लड़का एक लोअर मिडल क्लास से आने वाला, जोकि जूते के शोरूम पर जूते दिखाने का काम करता है दोनों एक सोशल मीडिया साइट पर मिलते हैं और वहीं से बातों बातों में दोनों को प्यार हो जाता है धीरे-धीरे दोनों का मिलना जुलना  घूमना फिरना रेस्टोरेंट में साथ में  लांच लेना शुरू होता है जिसके  बिल अक्सर लड़की ही चुकाती थी ! कुछ सालों के इस कथित प्यार के बाद बारी आई शादी की,जब लड़की के घर वाले लड़की के लिए एक अच्छे लड़के की तलाश कर रहे थे तभी लड़की उन्हें अपने प्रेम के बारे में बताती है और कह देती हैं कि वह शादी करेगी तो सिर्फ उसी लड़के से जिससे वो प्यार करती है एक हिंदुस्तानी पिता होने के नाते लड़की के बाप ने पहले तो बात सुनते ही बिल्कुल मना कर दिया लेकिन जब लड़की के रोज-रोज के रोने और किसी और से शादी ना करने की जिद सर चढ़ने लगी तो हार कर लड़की के पिता ने लड़की से लड़के को घर पर बुलाने को कहा !  इस सबके दौरान लड़का अपने परिवार वालों को नेहा के लिए मना चुका था ! इस वजह से लड़की के पिता से मिलने ना सिर्फ लड़का आया बल्कि उसके परिवार के कुछ सदस्य भी आए जिन्होंने लड़की के पिता को भरपूर समझाने की कोशिश की कि बच्चों का प्यार है बच्चों की आपसी समझ है हमें और आपको इन्हे आशीर्वाद देकर इन की शादी कर देनी चाहिए लड़की के पिता ने कुछ टाइम मांग कर उन्हें अपने घर से भेज दिया ! उनके जाने बाद लड़की के पिता ने अपनी लड़की को बहुत समझाया कि लड़का आर्थिक रूप से मजबूत नहीं है और वो लड़की के खर्चे नहीं उठा पायेगा लेकिन लड़की टस से मस मस नहीं हुई ! लड़की के पिता ने बाकी दो छोटी बहनों की भी दुहाई दी  कि अगर तू इस तरह करेगी तो छोटी बहनों के साथ क्या होगा लेकिन लड़की फिर भी मानने को तैयार नहीं लड़की पर सिर्फ लड़के  प्यार का पागलपन सवार था लड़की की मां ने भी समझाया कि वह परिवार हमारी बराबरी का नहीं है और जितने शौक तेरे इस घर में पूरे होते  हैं उस घर में पूरे नहीं हो पाएंगे और फिर रोयेगी वो अलग !  लड़की किसी भी तरह से मानने को तैयार नहीं कई हुई ! दिन बीते, हफ्ते बीते, महीने बीते, लेकिन लड़की मानने को राजी नहीं और आखिरकार 1 दिन लड़की ने वो किया जिसकी उसके पापा को बिल्कुल उम्मीद नहीं थी, एक रात लड़की, लड़के के साथ घर छोड़ कर चली गई घर ! फिर तकरीबन 1 हफ्ते बाद लौटी और जब आई तो उसने बताया कि वह उस लड़के के साथ शादी कर चुकी हैं यह सुनते ही उसके पिता ने एक भारतीय पिता की तरह उसे  उसी वक्त घर से निकाल दिया यह कहकर कि "जब शादी कर ही ली तो अब यहां क्यों आई है ??,जाए और अपने ससुराल में ही रहे अब वही उसका घर है !"  लड़की भी उसी वक्त अपने घर से चली अभी कुछ महीने ही बीते थे कि वही हुआ जिसका पापा को डर था एक दिन लड़की अचानक रोते हुए घर वापस आ गई और तब अपनी  लड़की को रोते हुए देख कर पापा उसके आंसुओं के आगे हार गए तब से लेकर आज तक उसकी शादी को तकरीबन 5 साल हो चुके हैं और पापा आज भी लड़की को पैसे देते रहते हैं लेकिन इन 5 सालों में लड़की के घर में बहुत कुछ हो चुका है लड़की के पिता पूरी तरह से शराब की आदी हो चुके हैं और लड़की की दोनों छोटी बहने जिसमें से  एक कहीं भी शादी करने को तैयार नहीं है और दूसरी का कहीं भी रिश्ता तय नहीं हो पा रहा !
दूसरी कहानी शिवानी, एक बड़े रसूखदार परिवार की छोटी बेटी जिसे जॉब करते करते एक लड़के से प्यार हो गया और यहां भी वही लड़की अमीर लड़का गरीब !  जात की बात रहने ही  देते हैं क्योंकि शहरों में जात बिरादरी से कहीं ज्यादा परिवार वालों का स्टेटस मैटर करता है जात बिरादरी तो फिर भी अब नजरअंदाज कर दी जाती है ! इस कहानी में भी यही हुआ लड़की के घरवालों ने लड़की को बहुत समझाया बहुत मनाया लेकिन लड़की मानने को राजी नहीं और जब लड़की को भी दिखा कि उसके परिवार वाले नहीं मान रहे हैं और लगातार उस पर कहीं और शादी कर लेने का दबाव बना रहे हैं तो उस लड़की ने लड़के के साथ कोर्ट मैरिज कर ली और जब घर आकर अपने परिवार को बताया तो उन्होंने भी उसी वक्त लड़की को घर से बाहर निकाल दिया कि जब शादी कर ही ली तो अब यहां किस लिए आई है जो परिवार तुमने सुना है उस में खुश रहो ! इस शादी में लड़की को तकरीबन डेढ़ 2 साल बीत चुके थे इस दौरान उसकी बेटी भी हुई ! शादी के 3 साल बीत जाने के बाद जब लड़की के छोटे भाई की शादी की बात हुई तो सभी के कहने और समझाने पर लड़की के माता-पिता ने लड़की के घर भी कार्ड भेज दिया लड़की भी भाई की शादी में आ गई मां बाप और सभी परिवार वालों से मिलकर खुश हुई जब परिवार के  कुछ लोगों ने लड़की से उसके ससुराल के हालचाल जाने तो पता लगा लड़का घर में रहता ही नहीं है, बस महीने में एक दो बार आ जाता है ! शादी क बाद से ही लड़का दिल्ली से बाहर रहकर नौकरी करने लगा ! अब घर में लड़की अकेले रहती है अपनी बेटी के  साथ ! परिवार क पूछने पर लड़की ने बताया की उसे ये सब अपने माँ बाप को बताने की हिम्मत नहीं हुई ! 
इन दोनों की कहानियों में जो की बिलकुल सच है, एक बात जो सामने आयी वो ये कि, इश्क़ करो और जरूर करो लेकिन जब अपने लिए कोई जीवनसाथी चुनो तो व्यवहारिक जरूर बनो क्यूंकि इश्क़ की आग में ना घर चलते है ना जिंदगी की गाडी ! 
#इश्क़ #प्रेमविवाह 



शनिवार, जून 08, 2019

अपना फैसला खुद करो !!

बात पिछले साल की  है जब लविश क्लास २ में था, तब एक दिन स्कूल से आने के बाद जब मैंने उससे रोज़ की तरह उसके बैग से टिफिन निकालते हुए पूछा 
लविश आज टिफिन कैसा लगा ?
थोड़ा गुस्से में और शिकायत करते हुए वो बोला, मम्मा आज मेरा पूरा  टिफिन _____ ने खा लिया !
क्यों ? वो अपना टिफिन नहीं लाया था क्या ???
लाया था, लेकिन उसने पता नहीं कब मेरे बैग से टिफिन निकाल कर लंच पीरियड से पहले ही खा लिया !
तेरा ध्यान कहाँ रहता है तू अपने बैग का ध्यान भी नहीं रख सका और मैडम क्या करती है क्लास में तूने उनको बताया ??
हाँ बताया था मैंने, और मैडम ने उसे बोला कि दोबारा ऐसे नहीं करना वरना पनिशमेंट मिलेगी और मुझे एक बिस्किट का पैकेट दे दिया मैंने लंच में फिर वो खा लिया  !
ठीक है , और आगे से खुद भी ध्यान रखा कर अपने बैग का और सामान का !
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तक़रीबन ३ या ४ दिन बाद फिर यही सब हुआ 
लविश : लगभग रोते हुए , मम्मा _______ ने मेरा टिफिन फिर से खा लिया और मैंने मैम को बोला तो उन्होंने बस उसे डाँट दिया लेकिन पनिश नहीं किया !!!
ठीक है, तू रो मत  मैं कल तेरी मैम से कल बात करती हूँ !!
और ये बात इस बार लविश ने अपने पापा को भी सुबह स्कूल जाने पहले बताई 
पापा कल ना मेरा टिफिन फिर से _______ खा लिया !!
फिर ?
फिर मैंने मैंम को बोला लेकिन मैम ने बस उसे थोड़ा सा डाँट दिया लेकिन पनिश तो किया ही नहीं !!
लविश के पापा : बेटा सुन अगर इस बार वो कभी भी तेरा टिफिन खाये ना तो मैम से कुछ मत बोलियों  तू बस उस _____ के मुँह पर एक खींच कर मारियो तबियत से ...... और डरियो बिलकुल नहीं !!
लेकिन पापा फिर मैम मुझे ही डाँटेगी और डायरी में नोट लिख कर पैरेंट्स  को बुलाएंगी !!
कोई  नहीं वो हम देख लेंगे लेकिन इस बार तू रो कर वापस मत आइयो !!
ठीक है पापा !!

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उस लड़के ने अपने बढ़ते हौसले और मैम के ज्यादा कुछ ना कहने की वजह से फिर वही किया , लेकिन इस बार लविश तैयार था उसने वही किया जो उसके पापा ने उसे समझाया और नतीजा ये हुआ कि पुरे साल उस लड़के ने दोबारा कभी लविश को परेशान नहीं किया !!!! हाँ लेकिन बाद में पता लगा कि बार बार बाकि बच्चों की कंप्लेंट की वजह उसका सेक्शन चेंज करा दिया गया और दुसरे सेक्शन में जाके क्या हुआ पता नहीं ! 

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कहने को तो बस ये एक छोटा सा मामला है क्लासरूम का लेकिन,  अगर समझा जाए तो यही आज का सिस्टम है , अगर मैम यानी प्रशासन ने सबसे पहली शिकायत पर ही एक सही एक्शन/फैसला  लिया होता तो ना उस बच्चे का हौसला बढ़ता और ना ही  लविश यानी विक्टम हिंसक होता !
यही बात #अलीगढ़ मामले में #ट्विंकल के साथ  हुई है !! अगर यहाँ भी पुलिस ने अपना काम पहली ही शिकायत पर ठीक से किया होता तो शायद मामला कुछ और होता लेकिन नहीं ऐसा नहीं हुआ और अब जब दूसरी शिकायत पर आरोपी गिरफ्त में है तो शासन से लेके प्रशासन तक सब लगे है बस हग मूत के लीपने पोतने में !!! और तरस आ रहा है उन माँ बाप पर जो इस उम्मीद है कि दोषी को कड़ी सजा मिलेगी जबकि वो अपनी ही बेटी से दुष्कर्म के इल्जाम पर भी खुला घूम रहा है !!!
जबकि होना ये चाहिए था कि उस बच्ची के माँ बाप को उन दोषियों को देखते ही उन दोनों को अपने हिसाब से उसी वक्त सजा दे देनी थी क्यूंकि प्रशासन ने तो अभी बहुत लीपना है !! 



मंगलवार, अप्रैल 09, 2019

चाय से धोखा

चाय ना हुई, मुआ इश्क़ हो गया,
जब पकती है तो बस इश्क़ सी पकती है
और जब महकती है तो इश्क़ सी ही महकती है
ये चाय,इश्क़ सी ही तो है
ठीक इश्क़ की ही तरह धीरे धीरे उबलती है
और जितनी उबलती है,उतनी ही गहरी होती है
बिल्कुल गहरे लाल सुर्ख इश्क़ की तरह
जैसे चाय में डूबे इलायची,अदरक
चाय का स्वाद बढ़ाते है,वैसे
इश्क़ में डूबे दो प्रेमी,
इश्क़ का स्वाद बढ़ाते है 
लेकिन वो कहते है ना बड़े बुजुर्ग  
ये आजकल का इश्क़ ना हुआ पानी का बुलबुला हो गया 
जितनी जल्दी बना उतनी जल्दी फुस्स 
 वैसे ही है, चाय के नए इश्कबाज़ 
जितनी जल्दी सर्दियों में चाय से इश्क हुआ 
उतनी जल्दी गर्मियों में ये चाय वाला इश्क फुस्स !!!
मतलब ये चाय का इश्क़ भी आजकल का इश्क़ हो गया !
जितना जल्दी इश्क़ उतना जल्दी धोखा !!

#चाय #इश्क़ #गर्मियाँ #धोखा 

शुक्रवार, जनवरी 04, 2019

क्यों पैदा किया

मेरे घर से कुछ दूरी पर एक तीनमंजिला मकान बना हुआ हैं जिसमे एक-एक मंज़िल पर कई कई किरायदार रहते है उनमे से ही एक परिवार ऐसा है जिसमे आठ सदस्य है ! माता पिता,चार बेटियां और दो बेटे ! बेटियां बड़ी हैं और दोनों बेटे छोटे ! अक्सर इनमे से सबसे छोटा बेटा जिसकी उम्र तकरीबन आठ या नौ वर्ष की होगी वो अक्सर हमारे घर खेलने आ जाया करता है पहले आने में हिचकिचाता था लेकिन धीरे धीरे वो खुल गया और मेरे बेटे को भी (जिसकी उम्र दो वर्ष है ) उसके साथ खेलना अच्छा लगने लगा ! अब दोनों शाम को अक्सर साथ खेला करते हैं ! मैं भी अक्सर उनके खेल में शामिल हो जाया करती हूँ इसी दौरान मैं उससे कुछ बातें भी कर लिया करती हूँ और बातों बातों में ही पता चला कि वो आठ सदस्यो का परिवार किस तरह रहता है! हुआ यूँ कि एक दिन जब खेलते खेलते बाहर अन्धेरा नज़र आया तब मेरी नज़र घडी पर गयी देखा तो नौ बज चुके थे, मैंने फ़ौरन उसे उसके घर जाने को कहा, "कहा कि बहुत देर हो गयी है अब तुम अपने घर जाओ तुम्हारी मम्मी चिंता कर रही होंगी " "इस पर वो हँसते हुए बोला कि नहीं मेरी मम्मी कुछ नही कहती" मुझे सुन कर हैरानी हुई ! मैंने फिर पूछा क्यों, तुम्हे देर से जाने पर डाँट नहीं पड़ती ?वो बोला "नहीं बल्कि उसकी मम्मी तो सो चुकी होंगी !" ये बात सुन कर हैरानी और बढ़ गयी सोचने लगी कि कैसी माँ है बच्चा घर से बाहर खेल रहा है और वो सो भी गयी !लेकिन उसके बाद जब मैंने उससे इस सब कि वजह पूछी तो जो बात सामने आयी उससे बड़ी हैरानी भी हुई और तरस भी आया !
असल में उस बच्चे की माँ घरो में झाड़ू पौछे का काम किया करती है और उसके पिता बेलदारी का काम करते है लेकिन फिलहाल वो घर में ही रहते है और उस बच्चे के कहे अनुसार उसके पिता रोज़ शराब पी कर घर में झगड़ा करते है और उस बच्चे को भी अक्सर मारा पीटा करते है जिस वजह से वो बच्चा अक्सर देर रात को ही अपने घर जाना पसंद करता है ! उसके बाद उसने बताया कि उसकी मम्मी रोज़ सुबह घर के सभी सदस्यो के लिए खाना बना कर और बाकी काम ख़त्म करके तक़रीबन छह बजे काम के लिए निकल जाया करती है और साथ उसकी बहने भी घरो में काम करने जाती है ! सबसे बड़ी बहन के बारे में उसने बताया कि उसकी शादी हो चुकी है और वो भी घरो में काम किया करती है और एक बहन किसी के घर में रहती है और वही रेह कर काम करती है !फिर मैंने पूछा और तुम दोनों भाई क्या करते हो तो वो तपाक से बोला मेरा भाई मोबाईल की दूकान पर काम करता है (जिसकी उम्र उसे पता नहीं बस इतना पता है कि वो आठवी क्लास में पढता है) और उसे पाँचसौ रुपए महीना मिलता है, और मैं यहाँ आ जाता हूँ ! ये सब सुन कर सच में एक बार तो बड़ा गुस्सा आया कि कैसे माँ बाप है जो अपने बच्चो से इतनी छोटी उम्र में काम करवा रहे है और जिन्हे अपने बच्चो की बिलकुल फ़िक्र ही नहीं कि वो सारा दिन कैसे रहते है कहाँ जाते है क्या करते है ?
अक्सर जब किसी बच्चे को इस तरह के हालात में देखती हूँ तो यही एक सवाल मन में उठता है कि आखिर क्यूँ इसके माँ बाप ने इसे पैदा किया जब वो इसे सही ढंग से पाल ही नहीं सकते तो क्यूँ इस बेचारे की ज़िंदगी इतनी बत्तर बना दी ? ये सवाल मैं अक्सर जब किसी माता पिता से पूछती थी तो जवाब मिलता था "अरे बेटा ये किसी के हाथ में नहीं होता ऊपरवाले ने इनकी किस्मत में यही लिखा है तो कोई क्या करें, कौन से माँ बाप चाहते है कि उनका बच्चा भूखा रहे और पढ़ लिख न सके !" उनकी इस बात पर मैं अक्सर यही सोचती अरे किस्मत उपरवाले ने लिखी है लेकिन किस्मत लिखवाने के लिए ऊपरवाले के पास पैदा करके तो माँ बाप ने ही भेजा है !लेकिन इस सबके बीच एक और बात भी सामने आती और वो ये कि बहुत से लोग सिर्फ एक लड़के के माता पिता कहलाने के चक्कर में इतने बच्चे पैदा कर लिया करते है ! अगर इस बात पर गौर करा जाए तो जिस परिवार का ज़िक्र मैंने किया है उसमे भी चारो बेटियां बड़ी ही है और बेटे छोटे, तो ये माना जा सकता है कि शायद उस माँ ने भी एक अदद बेटे की चाह में इतने बच्चो को जन्म दिया हो !
उफ्फ्फ !! मतलब फिर वही सब, घर में एक बेटा होना चाहिए बड़ा होकर जो माँ बाप का सहारा बनेगा कुल का नाम आगे बढ़ाएगा वगैरह वगैहरा !! अब बेटा होना चाहिए या नहीं होना चाहिए मैं इस विषय पर बात नहीं करना चाहती, हाँ लेकिन मैं एक सवाल उन सभी माता पिता से ज़रूर पूछना चाहूंगी जिन्होंने बेटे कि चाह में कई बच्चे पैदा किये है, क्या वो अपने सभी बच्चो को भरपूर पालन पोषण कर रहे है ?? इसे कुछ यूँ समझते है अभी मैंने ऊपर जिस लड़के की बात की मैं यहाँ भी उसी का उधाहरण देते हुए कहूँगी मैं जब भी उससे कुछ खाने के लिए पूछती तो वो झट से हाँ कह देता और जो भी मैं उसे देती वो बिना स्वाद लिए झट से खा लेता है धीरे धीरे वो रात का खाना भी मेरे बेटे के साथ ही खा कर जाने लगा और मैं भी बड़े शौक से दोनों को खाना खिला देती लेकिन धीरे धीरे मुझे अहसास हुआ कि वो खाना खाने के बाद फ़ौरन ही अपने घर चला जाता था लगा जैसे वो सिर्फ खाना बनने के इंतज़ार में है इतिफाक कि बात है कि अगले ही दिन मुझे खाना बनाने में थोड़ी देर हो गयी और मेरा बेटा भी दूध पी कर सो चुका था तो बचपन मैंने भी उसे जाने के लिए कह दिया लेकिन उस दिन उसका जाने का मन नहीं हुआ असल में वो खाने के इंतज़ार में था तभी मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी मम्मी ने क्या बनाया है उसने कहा "पानी वाले आलू" और साथ में ये भी कहा कि उसे वो अच्छे नहीं लगते ! मैंने कहा ठीक है थोड़ी देर रुको फिर यहीं खाना खा जाना और उस दिन के बाद से वो अक्सर रात का खाना मेरे घर पर ही खा कर जाने लगा इस दौरान मैंन जब भी उससे पूछा कि तुम्हारे घर पर क्या बना है तो उसके जवाब में अक्सर पानी वाले आलू ही हुआ करते थे ! अब कोई ये समझाए कि प्रतिदिन आलू कि सब्ज़ी और रोटी खिला देने भर को सम्पूर्ण पोषण कहा जा सकता है ?
अब तक मैंने एक ख़ास वर्ग कि ही बात की लेकिन ये बात सभी पर लागू होती जब हम अपनी कमाई से इतने बच्चो का पालन नहीं कर सकते इन्हे भरपेट भोजन नहीं से सकते, इन्हे अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते, तो क्यों इन्हे पैदा करते है ?? क्यों इन्हे बचपन में ही कमाई करने के लिए मजबूर कर देते है ?? क्यों इनका बचपन नरक बना देते है ?? जिस बेटे के लिए इतने बच्चे पैदा किये जाते है क्या उस बेटे की ही आधारभूत ज़रूरत पूरी हो पाती है ??और जिस बेटे को पाने के चक्कर में इतने बच्चे पैदा किये क्या उनकी ज़रूरते हम पूरी कर पाते है ?? क्यों हम अपने ही बच्चो को पिछड़ा और पिछड़ा बनाते चले जाते है, क्यों हम इस सोच से ऊपर नहीं उठ पाते कि बच्चा चाहे जो भी हो लड़का या लड़की हमे उसे हर स्तर पर आगे बढ़ाना है उसकी आधारभूत ज़रुरतो को पूरा करना है !! क्यों हम ना चाहते हुए भी, या सिर्फ एक लड़के की चाह में एक के बाद एक बच्चे पैदा करते जाते है ? क्यों ??

गुरुवार, दिसंबर 14, 2017

पहले मेरे बच्चे बाद में कुछ और ........!!!!

पिछले कई दिनों से मेरे घर मे छोटी छोटी चुहिया आ गयी है पहले पहल जब ये आयी थी तब इनकी संख्या एक या दो थी माने अल्पसंख्यक ही थी तो मुझे कोई परेशानी भी नही थी इधर उधर घूमती रहती, यहाँ वहाँ से कुछ भी खा लिया और सारे घर मे खेलती रहती ! मेरा छोटा बेटा इनको देख कर तब बड़ा खुश होता था उसके लिए तो ये चलता फिरता खिलौना थी ! उस वक़्त मैंने भी इनके निवारण के लिए कुछ नहीं किया क्योंकि इनसे कोई परेशानी थी ही नही और वैसे ये भी एक जीव ही है तो क्या हुआ अगर ये मेरे घर मे आ कर रह रही है सभी को जीने का अधिकार है तो मैं क्यों इनसे इनका ये अधिकार छिनू !
दिन बीते हफ़्ते बीते और फिर एक दिन मैंने गौर किया कि अचानक इनकी संख्या बढ़ गयी है अब ये 2-4 की संख्या में नहीं थी पहले वाली चुहिया शायद मेरी शराफत का फायदा उठा कर बाहर से औरो को भी ले आयी थी और अब ये अल्पसंख्यक नहीं थी अब ये धीरे-धीरे बहुसंख्यक में बदल रही थी ! अब इनकी इस बढ़ती संख्या ने धीरे-धीरे मेरे घर की चीज़ों को नुकसान पहुँचना शुरू कर दिया ! इन्होंने सबसे पहले मेरे रसोई में रखी खाने की चीज़ों पर हमला किया आये दिन कभी सब्जियां बर्बाद की तो कभी बच्चों के खाने के लिए रखे बिस्कुट,ब्रेड और नमकीन ! अब मेरा छोटा बेटा भी जो इन्हें पहले देख कर खुश होता था बल्कि इनके आगे पीछे भागता था अब वो भी इनसे डरने लगा और इनके सामने आते ही रोने लगता ! अब जब इनका आतंक बढ़ने लगा तो मुझे भी इनका निवारण करना ज़रूरी लगा तो मैंने घर मे चूहेदानी लगा दी जिसके कांटे में मैंने पनीर का टुकड़ा फँसाया लेकिन ये बड़ी समझदार निकली ये बिना किसी आहट के आती और पनीर लेकर भाग जाती ! मतलब पनीर भी जाता और उसको खाकर ये तंदुरुस्त भी होती और दिन प्रतिदिन इनकी सँख्या बढ़ती गई वो अलग ! और इसके मेरे घर में की जाने वाली इनकी मनमर्जी के तो कहने ही क्या !!
कई दिन तक यूँही चलता रहा,घर मे भी इनकी तेज गंध फैलने लगी साथ ही साथ इनसे होने वाली बीमारियों का डर भी सताने लगा, लेकिन जब देखा कि बहुत कोशिशों के बाद भी ना ही ये पकड़ में आ रही और ना ही इनके बढ़ते आतंक में कोई कमी आ रही तो तब मैंने इनको पकड़ने के लिए स्टिकी कार्ड का इस्तेमाल करना ठीक समझा, वो कार्ड जिस पर आते ही चुहिया वही उस कार्ड पर चिपक जाती है और मरने तक तड़पती रहती है हालांकि ये उपाय बड़ा ही क्रूर और बर्बर था क्योंकि इसमें इनकी मौत तड़प-तड़प कर होनी थी, लेकिन जब इन चुहियों के आतंक से मेरे घर के सामान पर और मेरे बच्चों पर इनका प्रतिकूल असर पड़ने लगा तो मुझे यही सही लगा और मैंने रात को कार्ड लगा दिया सुबह उठ कर देखा तो उस पर एक चुहिया चिपकी हुई थी जो शायद तड़प तड़प कर मर चुकी थी जिसका मुझे बड़ा दुःख भी हुआ और खुद पर गुस्सा भी आया कि उसे ऐसे क्यों मारा लेकिन फिर सोचा अगर ये शांति से रह लेती तो शायद इसके साथ ये ना होता लेकिन नहीं ये तो मेरे घर रहकर मुझे ही सताने लगी थी बस यही वजह थी जो मुझे ये कड़ा कदम उठाना पड़ा ! खैर मैंने वो कार्ड उठा कर फेंक दिया और अपने काम मे लग गयी !
इस एक घटना के बाद मैंने नोटिस किया कि सारी चुहियाँ अचानक से गायब हो गई, जैसे सभी ने एकसाथ ही मेरे घर से पलायन कर दिया हो, मै ये देख कर बड़ी ख़ुश हुई मुझे लगा वाह चलो एक चुहिया की मौत बाकियों को काफ़ी कुछ सीखा गयी, लेकिन मेरी ये खुशफहमी ज्यादा देर ना रही !
अभी कल ही की बात है जब मैं घर के परदे बदल रही थी तो अचानक ही एक चुहिया पर्दो में लटकी हुयी दिखी जो वहाँ हवा में लटके हुए करतब दिखा रही थी और  उसे देख मैं बहुत डर गई और अब मुझे खुद पर गुस्सा आने लगा कि क्यों मैंने ये यकीन कर लिया कि अब ये मेरे घर को नुक्सान नहीं पहुंचाएंगी ??? क्यों  ये मान लिया कि एक चुहिया की मौत से मुझे बाकी सबसे निजात मिल गया ??? ये मेरी सच में बहुत बड़ी भूल थी, खैर अब इनसे छुटकारा पाने के लिए  मुझे इनका कुछ पक्का इलाज करना होगा वरना ये यूँही गाहे बगाहे नुक्सान पहुंचाती रहेंगी और वैसे भी जब बात मेरे बच्चों के स्वस्थ जीवन की है तो उसके लिए थोड़ा सा क्रूर बनना शायद ग़लत नहीं होगा !
और यही हालात आजकल कुछ धर्म और समुदाय विशेष के भी है जिनका इलाज बहुत  जरुरी हो गया है ! खैर अब और क्या कहूँ इस बारे में क्यूँकि यहाँ समझदार भी सभी है और ज्ञानी भी !!

सोमवार, दिसंबर 11, 2017

जिंदगी की राजनीति !

1.बीती गर्मियों की बात है मेरे छोटे बेटे को बीमारी की वजह से एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 10 दिन के लिए एडमिट होना पड़ा था जिसमे से 3 दिन वो आईसीयू में रहा था ! जब 10 दिन बाद सुबह उसे डिस्चार्ज किया तो हॉस्पिटल ने बिल दिया 78 हज़ार का, बिल 78 हज़ार का इसलिए था क्योंकि बेटे का मेडिक्लेम करवाया हुआ था ! हॉस्पिटल ने बिल मेडिक्लेम कम्पनी में
भेजा और हमें कहा आप एजेंट को बता दीजिए ताकि वो जल्द इसे पास करवाये और फिर आपको डिस्चार्ज मिल जाएगा !
हमने एजेंट से बात की उन्होंने थोड़ी देर बाद बताया कि कंपनी ने क्वेरी डाली है कि हॉस्पिटल ने लूज मोशन जैसी बीमारी में इतने लंबे टाइम के लिए पेशेंट को क्यों रखा और आईसीयू से डिस्चार्ज होने के बाद भी 5 दिन हॉस्पिटल में रोके रखने की क्या जरूरत थी ??? खैर, हॉस्पिटल ने दोबारा दूसरा बिल तैयार किया और भेजा अब बिल गया 73 हज़ार का , मेडिकल कंपनी ने ये भी पास नही  किया उसने नई क्वेरी लगाई की हॉस्पिटल ने जो टैस्ट करवाये है उनकी जरूरत क्यों पड़ी और इसका जवाब उन्होंने सीनियर डॉक्टर्स से लिखित में माँगा उसके बाद तीसरी बार बिल गया 70 हज़ार का जिसे मेडिकल कंपनी ने फाइनली 68 हज़ार का पास किया !
अब हॉस्पीटल वालों ने हमे 4 हज़ार का बिल अलग से दिया और बोले ये आपको भरना पड़ेगा क्योंकि आईसीयू में जो अक्यूपमेंट्स इस्तेमाल हुए है वो मेडिकल के अंडर नहीं आते इसलिए ये बिल आप भरो हमने एजेंट को पूछा उन्होंने कहा हाँ होता तो लेकिन इतनी देर से जब बिल जा रहे थे ये तब क्यों नहीं बोले ?? बिल पास होने में सुबह से रात हो चुकी थी तो हमने भी ज्यादा बहस ना करके 4 हज़ार भर दिए !
TPA पेपर्स साइन करने के लिए जब मैं गयी तब मैंने वहाँ बैठी लेडी से पूछा मैडम अगर यही बिल आप कैश में देते तो बिल कितने का होता पहले तो उसने मुस्कुरा कर टाल दिया फिर जब मैंने दोबारा पूछा तो बोली मैडम अगर ये बिल कैश पेमेंट से होता तो ये डेढ़ लाख से ऊपर जाता !
अब दूसरी कहानी
2. मेरे परिवार की ही एक लेडी जिन्हें कुछ साल पहले रसोली हो गयी थी और जिसका उन्होंने एक प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन करवाया जिसमें ऑपरेशन के बाद उनका यूटरस निकाल दिया गया अब ऑपरेशन के तकरीबन एक साल बाद उन्हें फिर से दर्द शुरू हुआ उन्होंने उसी गायनोक्लोजिस्ट को दोबारा दिखाया डॉक्टर ने कुछ दिन ट्रीटमेंट किया जब फर्क नही पड़ा तो उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने को बोला तो उस लेडी ने एक प्राइवेट हॉस्पिटल में अल्ट्रासाउंड करवाया जिसकी रिपार्ट  उन्हें शाम को मिली जब रिपोर्ट लेजाकर उन्होंने गायनोक्लोजिस्ट को दिखाई तो डॉक्टर हैरान , डॉक्टर ने खुद उसी समय हॉस्पिटल में फ़ोन करके पूछा कि रिपोर्ट किसकी दी  है हॉस्पिटल स्टाफ ने कन्फर्म किया कि रिपोर्ट उन्ही लेडी की है ! दरअसल रिपोर्ट में ये था कि लेडी को दर्द यूटरस में सूजन की वजह से हो रहा है जबकि यूटरस तो था ही नही ! लेडी ने कंज्यूमर कोर्ट में केस फाइल किया हुआ है और ये केस फाइल होने के बाद हॉस्पिटल ने उस लेडी को केस वापस लेने के लिए एक अच्छा खासा अमाउंट आफर किया  जो उन्होंने लेने से मना कर दिया केस 1 साल से कंज्यूमर कोर्ट में है !
अब तीसरी कहानी
3. 2 साल पहले मेरे जेठ यानी मेरे पति के बड़े भाई को अचानक पीठ और कंधों में दर्द शुरू होने लगा उन्होंने पेन रिलीफ जेल लगा लिया है और शॉप पर ही काम करने वाले लड़के से ही अपने कंधे दबवाने लगे लेकिन उन्हें आराम नही  मिला और वो घर आ कर लेट गए जब काफी देर बाद भी कोई आराम नहीं मिला और उन्हें बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो उन्हें पास ही के प्राइवेट हॉस्पिटल में ले गए जहाँ ड्यूटी डॉक्टर्स ने चेक करने के बाद पेन रिलीफ इंजेक्शन लगा दिए और कहा कि थोड़ी देर बाद आराम आ जायेगा आप इन्हें ले जा सकते है लेकिन उन्हें फिर भी आराम नही आया तो डॉक्टर्स ने एक ट्राई लेते हुए कहा कि आप इनका एक ECG करवा लेना अगर ये ज्यादा परेशान  हो तो तब मेरे फादर इन लॉ ने कहा अगर जरूरत है तो आप ही क्यों नही  कर देते वैसे भी इन्हें अभी तक आराम नही मिल रहा ! डॉक्टर्स ने पापा के कहने पर उनका ECG किया और जब उसकी रिपोर्ट आई तो सबके होश उड़ गए ! दरअसल वो मामूली दर्द नहीं एक मेजर हार्ट अटैक था ! और रिपोर्ट के अनुसार उनके पास बचने के 30% चांस थे ! हर कोशिश की हर कॉन्टेक्ट यूज़ किया लेकिन कोई उन्हें नहीं बचा सका ! आज भी याद है जब उन्हें घर लाया गया तो उनकी बेटियों ने हमसे चिपक कर रोकर रोकर बारबार यही पूछा चाची पापा कहाँ गए चाची पापा को क्या हुआ पापा कुछ बोल क्यों नहीं रहे ! हमारे पास उस वक़्त सिवाय आंसुओ के और कुछ नहीं था !! 😔😔😔
अब बात आती है दिल्ली के शालीमार बाग के  मैक्स हॉस्पिटल की जिसका लाइसेंस सस्पेंड किया गया है तबसे कुछ लोग ऐसे हाय तौबा मचा रहे है कि जैसे हॉस्पिटल ही बन्द हो गया हो ! भई सिर्फ़ नए पेशेंट को एडमिट करना बंद हुआ है जो पहले से एडमिट है उनका इलाज अब भी चल रहा है और वैसे कौन सा ऐसा समझदार होगा जो उस हॉस्पिटल में इलाज कराना चाहेगा जहां जिंदा बच्चे को मरा बता कर उसे पैक करके दे दें !!  एक बार जरा उस बच्चे के माँ बाप से पूछना उन्हें कैसा लगा !!?? वैसे भी  जिस आम जनता की परेशानी की बात आप कर रहे हो वो आम जनता उसका बिल भी नहीं भर पाती !! एक मामूली सी बीमारी का भी ये हॉस्पिटल 2 या 3 दिन का बिल भी 1 लाख से नीचे नहीं बनाते ! इन हॉस्पिटल्स में बिना मेडिक्लेम के जाने के बारे में बन्दा सोचता भी नहीं है और अगर जाना भी पड़े तो भई रिसेप्शन वाले पहले आपसे आपकी हैसियत पूछते है उसके बाद आपको एडमिट करते है !
तो हर चीज़ में अपनी गंदी राजनीति मत घुसेड़ो, ज़रूरी नहीं कि समर्थन और विरोध की राजनीति हर बार ज़रूरी हो ! अगर इस एक फैसले से बाकी हॉस्पिटल्स को भी अक्ल आये तो ये सभी के लिए अच्छा ही होगा !
बाकी जिस पर बीतती है असल दर्द वही जानता है !

बुधवार, अगस्त 16, 2017

उसकी कहानी (अंतिम भाग)

नंदिनी की मौत को लगभग एक महीना बीत चुका था और इस दौरान उसके परिवार में काफी उथल-पुथल मच चुकी थी !
रातों को घर से गायब रहने वाला शशांक, आज गाड़ियां चोरी करने के जुर्म में जेल में था और विवेक भी कुछ अनचाही बीमारियों की वजह से अक्सर बीमार रहने लगा था !  इस सब के चलते पुरषोत्तम अपने काम से वोलेंट्री रिटायरमेंट ले चुका था ! शायद शारीरिक थकान से ज्यादा मानसिक थकान पुरषोत्तम पर हावी होने लगी थी उधर नंदिनी की माँ भी अब लगभग सारा वक़्त या तो अपने कमरे मे बन्द रह कर रोती रहती या फिर पुरषोत्तम की जिद पर उसके साथ कॉलोनी के पार्क में जाकर गुमसुम सी बैठ जाती ! अब दिन बस यूँही बीत रहे थे ! अब कब दिन हुआ कब रात ढली किसी को इससे मतलब ही नहीं था, अब सबकी दुनिया बस वो चारदीवारी ही थी !
पुरषोत्तम आज भी जब-जब नंदिनी को याद करता उसे रह-रह अपनी गलती का अहसास होता , उसने क्यों बात नहीं की नंदिनी से ? वो क्यों उसे उसके हिस्से का समय नहीं दे पाया ? क्यों वो सिर्फ़ उसके सभी खर्चे पूरे करने को ही अपनी जिम्मेदारी समझ बैठा ?????.........एक रात ऐसे ही सवालो में खोए हुए वो फिर से नंदिनी का लिखा वो आख़िरी कागज़ अपनी अलमारी से निकालता है और एक बार फिर उसे पढ़ने बैठ जाता है !!..............
हेलो पापा, कैसे है आप ?
पापा मैं आपकी नंदिनी, आपकी वही छोटी सी गुड़िया जिसे आप बचपन मे अपने कंधों पर बैठा कर घुमाते थे.....और जब आप थक जाते थे तो मैं फिर से रोने लगती थी और आप मुझे फिर से पूरे घर मे घुमाते थे .....और आपको याद है पापा, एक बार मम्मा ने बताया था कि जब आप मेरी उँगली पकड़ कर चलना सीखा रहे थे तब आपसे मेरा हाथ अचानक छूट गया था और मैं गिर गयी थी तब छोटी सी खरोंच आई थी मेरे हाथ और घुटने पर .....थोड़ा सा ख़ून भी निकल गया था.....तब मैं बहुत रोई थी और ये देख कर आप भी रो पड़े थे तब आपको देख कर मम्मा बहुत हँसी थी !!! और फिर उस दिन आप मेरी वजह से ऑफिस भी नहीं गए थे !!
आपको याद है पापा, शशांक और विवेक के आने के बाद जब भी हम तीनों में कभी झगड़ा होता, तो आप हमेशा मेरी ही साइड लेते थे और मम्मा तब बहुत गुस्सा करती थी और शशांक और विवेक भी रो पड़ते थे .....और ये सब देख कर मुझे बड़ा मजा आता था
और हाँ, पापा आपको वो बात याद है जब 9th क्लास में मेरा एक लड़के से झगड़ा हो गया था तब आपने उसे उसके घर जाकर भी डाँट लगाई थी .....और पापा, याद है मैं जब भी शाम को अगर शशांक के साथ कहीं जाती तो आप हमेशा शशांक को  मेरा ध्यान रखने को कहते जबकि मैं हर बार कहती कि ये तो मुझसे छोटा है !!!
लेकिन पापा जब आपने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए जिस दिन हॉस्टल भेजा था ना उस दिन मैं आपको याद करके रात भर रोई थी, हालाँकि मैं बड़ी हो चुकी थी लेकिन पापा आप ही कहते थे ना कि बच्चे हमेशा बच्चे होते है और शायद मैं उस वक़्त मैं बड़ी होने की जगह बच्ची बन गयी थी .....पापा मुझे यहाँ हमेशा आपकी याद आती थी क्योंकि यहाँ जब मैं रात में अकेले जागती थी ना तो आप मेरे साथ बातें करने के लिए नहीं होते थे और जब भी मेरा किसी से झगड़ा होता तो आप उसको डाँटने के लिए भी नहीं होते थे .......शायद मुझे आपकी आदत हो चुकी थी और वो आदत जा ही नहीं रही थी .......मैं जब भी आपसे फ़ोन पर बात करने की कोशिश करती आप हमेशा बिज़ी होते थे और मैं फिर अकेली हो जाती ......शायद इसी वजह से मैं नशा करना सीख गई और मुझे याद है जब आपको ये पता लगा था तो आपको बहुत गुस्सा आया था और फिर धीरे -धीरे आपने मुझसे बात करना बंद कर दिया !!!!
फिर बस मम्मा के थ्रु ही बात होती .....पापा मैं वापस आप सबके पास आना चाहती थी मुझे नहीं पढ़ना था आगे !! मैं ये सब भी छोड़ना चाहती थी लेकिन शायद मैं इस नशे के दलदल में फँस चुँकि थी पापा सच में मैंने बहुत कोशिश की इस सबसे बाहर निकलने की लेकिन जब भी मैं ऐसा करती मुझे मैं फिर से अकेली लगती ......हर बार कोशिश करती और हर बार हार जाती लेकिन आज मै थक गई पापा ....अब और कोशिशें नहीं होती इसलिए आज जा रही हूँ आप सबसे दूर ....मुझे माफ़ करना पापा मैं आपकी फ़िर से वो प्यारी बेटी नही बन पाई .......!!!!
आपकी नंदिनी .....