गुरुवार, मई 13, 2010

धर्म बड़ा या कर्म फैसला आपका ........

 मुझे धर्म के नाम पर बोलना ज्यादा आता नही क्योकि या तो इसका ज्ञान मुझे नहीं है या फिर जितना है वो बहुत थोडा है और इस आधे अधूरे ज्ञान के सहारे मैं अज्ञानता नहीं फैलाऊंगी ! हाँ, लेकिन आज एक कहानी ज़रूर सुनाउंगी जिससे ये तय हो सके की जिस धर्म के लिए हम अक्सर लड़ते है,या जिस धर्म के नाम पर हमारे नेता अपना वोट बैंक भरने की जुगत में लगे रहते है  वो धर्म ज्यादा बड़ा है या फिर हमारा कर्म ! एक गाँव  में एक परिवार रहता था जिसमे सिर्फ तीन लोग थे एक बूदी  माँ उसका बेटा और उसकी पत्नी ! एक बार की बात है कुम्भ का मेला लगा हुआ था तब माँ ने अपने बेटे से इच्छा जाहिर की कि बेटा मेरी तो उम्र हो गई है सोच  रही हूँ इस दुनिया से विदा लेने से पहले कुम्भ नहा लू ! बेटा, माँ कि इस इच्छा को सुन कर बोला हाँ माँ अगर तेरा मन है तो मैं तुझे ज़रूर कुम्भ ले जाऊंगा इस पर माँ बोली नहीं ठीक है बेटा तू मेरे जाने के तयारी कर दे और बहु से कहा कि बहु मैं कुम्भ जा रही हु रास्ते में खाने के  लिए कुछ बना देना बहु को अपनी सास का कुम्भ जाना अच्छा नहीं लगा क्योकि उसे खर्चे कि चिंता थी उसने अपने पति से पूछा कि क्या बनाऊ सास के लिए तो बेटे ने बोला  लड्डू बना दो माँ को ताकि माँ को खाने कि परेशानी ना हो इस पर बहु और चिद गई उसने गुस्से में आकर अपनी सास के आटे कि भूसी के लड्डू बना दिए और अपनी सास को दे दिए ! अगले दिन बेटा अपनी माँ को लेकर कुम्भ पहुच गया और माँ को एक झोपडी में ठहरा दिया और कुछ दिन बाद ले जाने के लिए कह कर चला गया ! अब वो बूदी माँ रोज़ सुबह उठती और गंगा स्नान करके अपनी झोपडी में आकर पूजा पाठ में लग जाती जैसे ही उसकी पूजा खत्म हुई तो उसे भूख लगी और उसने खाने के लिए लड्डू निकाले जो उसकी बहु ने बना कर दिए थे परन्तु जैसे ही लड्डू खाना चाहा वैसे ही किसी ने दरवाज़े के बाहर से आवाज़ लगाई "टातरिया खाद्काऊ गोपाल लड्डू पाउ" माँ उठ कर देखा तो एक छोटा सा बालक दरवाज़े पर खड़ा था, माँ ने बड़े प्यार से उसे अपना लड्डू दे दिया ! अगले दिन जब वो बूदी माँ फिर से स्नान करके आई और फिर से अपने लड्डू निकले तो तभी वो बालक दौबारा आ गया और फिर से यही कहने लगा "टातरिया खाद्काऊ गोपाल लड्डू पाउ" माँ ने फिर से उसे अपनी थाली का लड्डू दे दिया इसी तरह रोज़ ऐसा होने लगा और इस तरह माँ के अपने साथ लाये हुए सभी लड्डू वो बालक ही खा गया ! अब कुछ दिन बाद उस माँ का बेटा उसे ले जाने के लिए आया तब माँ स्नान करने के लिए गई हुई थी तब उस बेटे ने दिखा कि झोपडी में चारो तरफ स्वर्ण मुद्राए बिखरी हुई है जब उसकी माँ स्नान करके वापस आई तब उसने अपनी माँ से पूछा माँ ये सब किसके है माँ ने कहा बेटा पता नहीं इस झोपडी में मेरे सिवा तो कोई नहीं आता तब बेटे ने वो सभी मुद्राए उठाई और अपनी माँ के साथ उन्हें भी अपने घर  ले गया ! जब उसकी बहु ने ये सब देखा तो उसने अपनी माँ को भी कुम्भ में जा कर स्नान करने के लिए कहा और अपनी माँ के लिए उसने असली घी और मेवे और गुड के लड्डू बनाये और अपने पति से कहा वो उसकी भी माँ को कुम्भ में ले जाए ! तब वो बेटा अपनी सास को लेकर कुम्भ में ले गया और उसे भी एक झोपडी में ठहरा कर कुछ दिन बाद आपने के लिए कह कर चला गया अब उस बहु कि माँ रोज़ सुबह उठती और स्नान करके झोपडी में ही बेठ कर पूजा करने लगती वो पूजा कर करके जैसे ही अपने खाने के लिए लड्डू निकलने लगी तभी दरवाजे पर से एक आवाज़ आई "टातरिया खाद्काऊ गोपाल लड्डू पाउ" तब उस बहु कि माँ ने जवाव दिया 'जा मरे, गुड घी के लड्डू धी के जमाई के तोय दोऊ या आप खाऊ" ऐसा कह कर उसने उस बालक को वहाँ से भगा दिया और इसके बाद अब रोज़ ऐसा होने लगा वो बालक रोज़ आता और रोज़ वो उसे ऐसे ही भगा देती ! अब कुछ दिन बाद उसका जमाई उसे वापस लेने आया तो उसने झोपडी में देखा तो उसे अपनी सास वहाँ ना दिखाई दी तब उसने सोचा कि वो शायद अभी स्नान के लिए गई होगी ये सोच कर उसने रुक कर थोडा इंतज़ार किया लेकिन उसकी सास नहीं आई तब उसने वहाँ आस पास के लोगो से पूछा तो उन्होंने कहा कि इस झोपडी में तो उन्होंने किसी भी औरत को नहीं देखा तब वो उस झोपडी के अन्दर गया तो  उसे वहाँ लड्डू का खाली बर्तन  मिला और वही पर उसे एक चुहिया भागती हुई दिखाई दी, जब उसने उस चुहिया को पकड़ा तो वो चुहिया झट से उसके पास आ गई और तब वो उसी खाली बर्तन और उस चुहिया को ले कर अपनी पत्नी पास गया और ले जा कर उसने वो चुहिया अपनी पत्नी को दे दी और कहा कि यही तुम्हारी माँ है !
पहली औरत ने धर्म भी निभाया  और कर्म भी लेकिन दूसरी औरत ने धर्म तो निभाया पर कर्म नहीं, वो रोज़ गंगा सनान करती रही लेकिन उसका कर्म उसके धर्म के आगे हार गया ! तो इसका क्या मतलब हो सकता है धर्म बड़ा या कर्म ????

बुधवार, मई 12, 2010

सतयुग से चली आ रही है निरुपमा .........

"यत्र नारिय्स्ते पूज्यन्ते तत्र देवता रमयंते"
जहां नारी कि पूजा होती है वहीँ देवताओं का वास होता है ! कई बार सुनी है ये बात ! नारी को पूजना मतलब नारी को भगवान् का स्थान देना और कहा भी गया है कि नारी भगवान् का दूसरा रूप होती है, लेकिन जब भगवान् के इस दूसरे रूप को पुरुष अपनी संपत्ति समझने लगे तब ???
रामायण के उत्तर काण्ड में वाल्मीकि जी द्वारा लिखा गया है कि जब भगवान् श्री राम, सीता जी को लंका विजय के बाद लेकर आये तो उन्होंने सीता जी से कहा कि "मैंने तुम्हे अपने प्रतिष्ठा कि रक्षा के लिए छुड़ाया है और अब तुम दसो दिशाओ में जहां चाहो, जा सकती हो !"
कुछ ऐसा ही संदर्भ एक और कथा में मिलता है, जब ऋषि परशुराम ने अपने पिता, जमदग्नि के कहने पर अपनी माता रेणुका का वध किया और ये वध ऋषि परशुराम द्वारा अपने पिता को अपने आज्ञाकारी होने का प्रमाण देने के लिए किया गया था !
अगर हम हिन्दू पुराण-शास्त्र पदे तो हमे ऐसे कई उधाहरण मिलेंगे जिसमे एक स्त्री को पुरुषो द्वारा अपनी प्रतिष्ठा कि रक्षा के लिए मारा या छोड़ा गया है !
अब क्योकि इतिहास खुद को दोहराता है इसलिए सतयुग से चली आ रही ये परम्परा या प्रथा आज खुद को दोहरा रही है, बल्कि यू कहे कि ये सतयुग से ही चलायमान रही है ! ये कभी समाप्त ही नहीं हुई थी !
पहले सतयुग और अब कलयुग में वर्ष-प्रतिवर्ष इसकी संख्या में इजाफा होता रहा है ! प्रतिष्ठा के लिए की जाने वाली नारी हत्याए ना सिर्फ़ भारत में बल्कि अन्य देशो में भी देखने को मिलती है, इसलिए हम यह नहीं कह सकते की प्रतिष्ठा हत्या या ओनर किलिंग जैसी विचारधारा सिर्फ भारत में ही विकसित हो रही है ! ये वर्ष-प्रतिवर्ष बदती जा रही है ! लेकिन अक्सर ये देखने में आता है की इस तरह की ओनर किलिंग का शिकार ज्यादातर महिलाए ही होती आई है !
इसकी गहराई में उतर कर जितना इसके बारे में जानने की कोशिश की ये खाई उतनी ही गहरी होती चली गई ! कितनी ही निरुपमाये आज अतीत में दफन हो चुकी है !
मई 2008 में हरियाणा के पूर्वी राज्य बल्ला गाँव में इसी तरह एक शादी-शुदा जोड़े की लड़की के परिवारवालों ने इसलिए हत्या कर दी गई क्योकि लड़का नीची जाती का था, उस वक़्त लड़की 22 सप्ताह की गर्भवती थी ! इस दोहरी हत्या के बाद लड़की के पिता और और उसके चचेरे भाइयो का कहना था की हमने जो किया उस पर हमे गर्व है क्योकि ये नेतिकता के लिए ज़रूरी था !
कैसी नेतिकता ???  9 मई को अंतर्राष्ट्रीय मदर डे था, सभी ने माँ को ख़ुशी देने के कुछ ना कुछ किया होगा सभी ने माँ को इस दिन पूजा पर उस माँ का क्या जिसकी  उसके गर्भ समेत  हत्या कर दी गई ! उसके भी अपने बच्चे के लिए कुछ अरमान रहे होंगे, क्या तब माँ की इज्ज़त करना ज़रूरी नहीं समझा गया ! यहाँ एक और तथ्य याद आता है, रामायण में बताया गया है की जब राम जी ने सीता जी को निर्वासित (त्याग) किया तब सीता जी भी गर्भवती थी !लेकन फिर भी उनका निर्वासन किया गया बिना ये सोचे की वो अपने शिशु की रक्षा कैसे करेंगी !
20 जुलाई 2007 को साउथ लन्दन में भी एक ओनर किलिंग हुई जिसमे लड़की जिसका नाम बनाज़ महमूद था, उस वक़्त गर्भवती थी और उसकी हत्या उसके पिता और चाचा द्वारा करवाई गई ! यहाँ भी मामला उंच नीच का था !
कुछ इसी तरह की घटना भागलपुर में हुई जिसमे एक साथ 8 लोगो की हत्या की गई, इसमें भी लड़का नीची जाती का था !
घटनाएं और भी है इनका कोई अंत नहीं है, आज ये ओनर किलिंग ना सिर्फ भारत में बल्कि ग्रेटब्रिटेन,ब्राज़ील,इटली,पकिस्तान,स्वीडन,अमेरिका  जैसे देशो में भी होती आ रही है ! यू एन कमीशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में 5000 हज़ार ओनर किलिंग हर साल होती है !
 आज भले ही हम इकिस्वी सदी में जी रहे है लेकिन हम फिर भी इस ऊँच-नीच के भेद को नहीं भुला पा रहे है ! यही वजह है की ये ओनर किलिंग की घटनाएं लगातार बदती जा रही है !
आज निरुपमा को इन्साफ दिलाने के लिए केंडल मार्च निकाले जा रहे है हर तरफ उसे इन्साफ दिलाने की मांग की जा रही है और पूरी उम्मीद है की निरुपमा को इन्साफ ज़रूर मिलेगा, लेकिन क्या इसके बाद किसी और निरुपमा की हत्या नहीं होगी ? क्या निरुपमा को मिला इन्साफ लोगो के लिए एक सबक बन सकेगा ? ज्यादा दिन नहीं हुए जब मनोज और बबली हत्याकांड में भी कुछ इसी तरह के इन्साफ की मांग उठी थी और दोनों को इन्साफ भी मिला, लेकिन उसके बाद क्या हुआ ? सभी जानते है गाँव की पंचायत ने दोषियों को बचाने के लिए घर-घर जा कर पैसे इकट्ठे किये !
मैं अक्सर अपने लेख में एक रास्ता, एक उम्मीद तलाश ही लेती हूँ की हाँ, आज नहीं तो कल,  ऐसा होना बंद हो जायेगा लेकिन आज ओनर किलिंग की गहराइयों जब उतर कर देखा तो इससे बाहर आने का कोई रास्ता नज़र नहीं आया बल्कि ऐसा  लग ही नहीं रहा की ये कभी ख़त्म होंगी ! मुझे ऐसा कोई रास्ता नज़र नहीं आया कि जिस पर चल कर इसे हमेशा के लिए ख़त्म करने की कोशिश  की जा सके !  लेकिन क्या आपको कोई रास्ता नज़र आ रहा है ???

मंगलवार, मई 04, 2010

सब हो जायेगा....... अपने पास जुगाड़ है !!!

अक्सर आप सभी ने ये शब्द सुना होगा और सुना क्या होगा खुद इस्तेमाल भी किया होगा हाँ भई आखिर आज के समय में बिना किसी जुगाड़ के कोई काम तो वैसे भी नहीं होता ! अब कल ही बात है  किसी को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना था तो इसके लिए वो आरटीओ के ऑफिस का रास्ता ढूंढने के बजाये लगा कोई जुगाड़ तलाशने की कही से कोई मिल जाये तो लाइसेंस जल्दी बन जाये सही भी है अब इतनी गर्मी में सरकारी दफ्तरों के चक्कर कौन काटे, और वो भी तब जब इनके काम करने की रफ़्तार सभी जानते हो ! खेर बताने की ज़रूरत नहीं की उसका लाइसेन्स कैसे बना होगा ! आप सभी जानते है आपने भी अपने-अपने लाइसेन्स ऐसे ही किसी दलाल या किसी जुगाड़ की मार्फ़त बनवा लिए होंगे, बिना कोई ड्राइविंग टेस्ट दिए, तभी तो आजकल दिल्ली की सडको पर हर तरह का ड्राइवर उपलब्ध है !
वैसे ऐसे कितने काम है जो हम ऐसे ही जुगाड़ लगा कर कर लेते है या करवा लेते है सोचो-सोचो थोडा तो सोच कर देखो ! सोच लिया तो अब बताओ  की उन सब से किस का फ़ायदा हुआ ? ये लो जी कर दिया मैंने मूर्खो वाला सवाल अरे भई फ़ायदा तो आप ही का हुआ बस एक जुगाड़ से सब कुछ हो गया ! लाइसेन्स बन गया,राशन कार्ड बन गया, और राशन कार्ड बन गया तो वोटर आईडी भी बन गया और एक बार वोटर आईडी बन जाये तो फिर तो पासपोर्ट भी बन गया लो जी मुबारक हो इस तरह आप बन गए एक देश के नागरिक, फिर चाहे आप उस देश के नागरिक हो या नहीं लेकिन एक जुगाड़ ने आपको देश की नागरिकता दिला दी ! अब ये तो वास्तव में मिठाई बाटने वाली बात है अरे भई सीधी से बात है एक छोटी सी जुगाड़ कितने फायदे की साबित हुई ! इस एक जुगाड़ से कोई भी ऐरा गेरा नत्थू गेरा बन जाता है किसी भी देश का नागरिक, अरे नहीं-नहीं किसी भी देश का नहीं सिर्फ भारत का क्योकि ये जुगाड़ तो यही चलता है ना ! कभी सोच कर देखा है सिर्फ एक राशन कार्ड बन जाने से ही कोई भी बाहरी हमारे देश की नागरिकता कितनी आसानी से हासिल कर लेता है ! बहुत ज्यादा नहीं सिर्फ 100 -200 रूपये दे कर कोई भी आसानी से राशन कार्ड बनवा लेता है और यही वो एक सबसे बड़ा प्रूफ होता है जिससे आगे की सारी प्रक्रिया चलती है !
कभी-कभी तो अपनी इस जुगाड़ की आदत पर गर्व भी होता है और सच में फक्र से कह भी देती हूँ की हम भारतीय तो वो इंसान है जो ताले के मार्केट में आने से पहले ही उसकी  चाबी  दूंद  लेते  है, भई आखिर  हम अक्ल के धनी जो है ! इसका एक उधारण है ना बिजली के मीटर जिसकी रफ़्तार एक छोटी सी तार से ही रुक जाती है, उधारण तो और भी है लेकिन बता कर क्या फायदा आप सब समझदार है ! वैसे कितना अच्छा लगता है ये सुन कर जब अमेरिका का राष्ट्रपति भी अपने देश के नागरिको से कह देता है की अगर भारतीयों विद्यार्थियों से आगे निकलना है तो हमे उनके जैसे सोचना पड़ेगा ! बोले तो जुगाड़ी बनना पड़ेगा ! जहां किसी देश में किसी प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए विद्यार्थी गढ़ मेहनत करते है वही यहाँ के विद्यार्थी मास्टरों की जेब गर्म करते है और जो नहीं कर पाते वो मुन्ना भाई बन जाते है ! हालाँकि सभी ऐसे नहीं होते, मैंने भी अपनी डिग्रिया  मेहनत से हांसिल की है मुन्ना भाई बन कर नहीं !
अभी कुछ दिन पहले एक फिल्म आई थी जिसका नाम था "रण" और उसको देखने के बाद तो मिडिया पर से भी भरोसा उठने लगा ! वैसे भी अक्सर नेता और अभिनेता ये कह भी देते है कि हमारे बारे में गलत छापा गया तब सुन कर लगता था कि हाँ आज ये पकड़ा गया तो ऐसा कह रहा है ! लेकिन अब धीरे-धीरे चीज़े समझ आने लगी और यही याद आया कि जब "हर शाख पर उल्लू बैठा हो, तो अंजामे गुलिस्ता क्या होगा ?"
फिर सोचा कि क्यों ना इस सबके खिलाफ आवाज़ उठाई जाए तो अचानक एक और दोहा याद आया कि "अकेला चना क्या भांड फोड़े" और साथ ही साथ बाबा रामदेव भी याद आ गए जिनके इस सबके खिलाफ आवाज़ उठाने को लेकर कुछ राजनीतिज्ञों ने उन्हें सनकी तक कह दिया ! फिर अचानक टीवी पर एक विज्ञापन देखा जिसकी टेग लाइन है "आज से खिलाना बंद और पिलाना शुरू" पर ये भी कुछ असर दिखाती नज़र नहीं आ रही तो क्या करे हम भी मूक और बधिर बन कर तमाशा देखे या कुछ करे या फिर सच में इस देश का कुछ नहीं हो सकता ??????

गुरुवार, अप्रैल 22, 2010

खाप पंचायत, सतयुग से कलयुग तक............

"खाप पंचायत" ये नाम तो अब लगभग सभी सुन चुके होंगे ! पिछले कुछ दिनों से ये काफी चर्चा में है और इनके चर्चा में होने का कारण है इनके जारी किये गए अनोखे फरमान, जिन्हें  लोगो द्वारा तुगलकी फरमान कि संज्ञा दी गई !
 खाप पंचायतो का इतिहास बहुत पुराना है और ये  महाभारत काल से लेकर रामायण काल और उसके बाद मुग़ल शासन का सफ़र करते हुए अब  इस इकिस्वी सदी (कलयुग) के समाज में अपने वजूद के साथ आज भी कायम है !
कहा जाता है कि जब "राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान् शिव को ना बुलाकर उनका अपमान किया गया तब पार्वती जी ये अपमान सह ना पाई और उन्होंने   यज्ञ  के हवन कुंड कि अग्नि में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए थे, जब  शिवजी को ये पता लगा तो बहुत क्रोधित हुए और तब उन्होंने  वीरभद्र को ये आज्ञा दी कि वो अपनी गन सेना के साथ जा कर राजा दक्ष का यज्ञ नष्ट करके उसका सर काट दे" ! खाप पंचायतो कि ये सबसे पुरानी घटना मानी जाती है !
रामायण काल में भी इन खाप पंचायतो का उल्लेख मिलता है, कहा जाता है कि हनुमान जी कि वानर सेना वास्तव में एक सर्व खाप पंचायत ही थी जिसमे भील,कोल,वानर,रीच,जटायु,रघुवंशी आदि विभिन्न जातियों तथा खापो के लोग सम्मिलित थे लेकिन क्योकि इसमें वानर अधिक थे इसलिए इन्हें वानर सेना कहा गया ! इस सेना के अध्यक्षता  महाराजा  सुग्रीव ने कि थी और इनके सलाहकार थे वीर जामवंत !
समय के चक्र के साथ काल बदलते गए युग बदलते गए लेकिन ये खाप पंचायते हर युग में देखने को मिलती रही ! सतयुग से लेकर मुग़ल शासन और उसके बाद  अंग्रेजो  के शासन काल तक इन खाप पंचायतो के वजूद को कोई हिला ना सका ! मुग़ल काल में समाज को एक स्वस्थ वातावरण देने के लिए इन पंचायतो का सहारा लिया जाने लगा क्योकि उस समय हर व्यक्ति से राजा निजी तौर पर मिल कर समस्या हल नहीं कर सकते थे इसलिए ये खाप पंचायते ज़रूरी हो गई ! ये तब एक तरह कि प्रशासन पद्दति के रूप में काम करने लगी और गाँव तथा प्रान्तों के छोटे बड़े फैसले यही पंचायते करने लगी इसके बदले इन्हें राजाओ से ऊँचे ओहदे तथा अन्य भेट मिलने लगी ! इनके द्वारा लिए  गए हर फैसले  को इनके अधीन आने वाले सभी गाँव तथा प्रान्तों को मानना ज़रूरी था !
लेकिन भारत कि आज़ादी के बाद से इन खाप पंचायतो कि ताकतों को देश के राजनीतिज्ञों ने भली भांति भाप लिया ! और तब ये राजनीतिज्ञ इस बात को अच्छी तरह से समझ चुके थे कि पंचो  द्वारा लिया गया कोई भी फैसला गाँव के हर व्यक्ति के लिए किसी पत्थर की लकीर के समान ही था और उस लकीर को मिटाने की हिम्मत किसी में भी ना थी, और यही वजह रही की राजनीतिज्ञों द्वारा इन खाप पंचायतो का इस्तेमाल  अपने वोट बैंक को बढाने के लिए किया जाने लगा और यही से ये खाप पंचायते सियासी रूप लेने लगी जिनका लाभ राजनेताओ ने जम कर उठाया ! और आज इसकी बानगी हमे इनके तुगलकी फरमानों के रूप में देखने को मिल रही है !
आज ये खाप पंचायते हिन्दू मेरिज एक्ट में संशोधन की मांग कर रही है इनकी मांग है की सरकार "एक गोत्र में होने वाली शादियों को अवैध करार दे" क्योकि इनका मानना है की एक गोत्र के सभी लड़के और लडकिया आपस में भाई-बहन होते है फिर चाहे कितनी भी पीढ़िया क्यों ना गुजर गई हो ! अपनी इसी सोच के चलते इन्होने मनोज और बबली हत्याकांड के दोषियों को बचाने के लिए हर घर से दस दस रुपए इक्कठे किये क्योकि मनोज और बबली एक ही गोत्र के थे और इसलिए  इनके अनुसार उनकी हत्या करने वाले दोषी नहीं है बल्कि दोषी मनोज और बबली थे जिन्होंने एक ही गोत्र में शादी की ! लेकिन अगर इनकी एक गोत्र में शादी ना करने की मांग को मान लिया जाता है तो आज जितने लोग इसके समर्थन में है उतने ही शायद इसके विरोध में भी हो क्योकि दक्षिद भारत में ना सिर्फ एक गोत्र में बल्कि एक बहन अपने बेटे के लिए अपने ही भाई की बेटी को दुल्हन के रूप में भी स्वीकार करती है और वहां इसका कोई विरोध नहीं है !
लेकिन आज ये खाप पंचायते राजनेताओ के लिए अपने वोट जुटाने में बहुत मददगार साबित हो रही है जैसा की मैंने पहले भी बताया की इन पंचायतो द्वारा लिया गया कोई भी फैसला इनके अधीन आने वाले सभी गाँवो के लिए मान्य होता है तो उसी का फायदा ये राजनेता उठा रहे है क्योकि इन पांचो का एक फैसला भी तख्ता पलट करने की हिम्मत रखता है ज्यादा दिन नहीं हुए जब 84 गाँवो वाली बालियाँ खाप के प्रमुख महेंद्र सिंह टिकेट ने किसान आन्दोलन चला कर उस वक़्त पूरी सत्ता को हिला कर रख दिया था और यही वो मूल वजह है जिसकी वजह से आज ये पंचायते  आज के इस युग में ये अपना आधिपत्य स्थापित किये हुए है ! आज ये पंचायते अपना समाजिक दायित्व भूल कर सियासी रंग में रंग चुकी है और इनको रोकना मतलब अपनी सत्ता को खोने जैसा है क्योकि इनकी विरोध में जो भी सत्ता कदम उठाएगी वो शायद दोबारा देश में शासन नहीं कर पायेगी !
तो क्या आज का समाज  इनके इन तुगलकी फरमानों को यूही चुपचाप मानता रहे ???? क्योकि जब तक ये नेता इन्हें अपना वोट बैंक मानते रहेंगे तब तक तो इन पंचायतो के फैसलों में कोई परिवर्तन संभव नज़र नहीं आता दिख रहा ! इस लेख पर अन्य लोगो की प्रतिक्रिया जानने के लिए यहाँ क्लीक करे 1http://sonigarg.jagranjunction.com/author/sonigarg/

बुधवार, अप्रैल 07, 2010

नारी का आँचल

हवा में जब उड़ता ये आँचल
दिल किसी का धडकाता ये आँचल

         पायल कि मधुर थिरकन पर
          गीत मधुर गाता ये आँचल

नारी की हर ताल के संग
लहर-लहर लहराता ये आँचल

सुन चूडियो की खनक को
मंत्रमुग्ध होता ये आँचल

देख चेहरे की चमक को
दांतों तले दब जाता ये आँचल

एक बार पिया जो आये सामने
शर्मा कर रह जाता ये आँचल

नारी के उजले सौन्दर्य को
अपने में छिपाता ये आँचल

नारी का बनता पहरेदार हमेशा
उसकी शर्म हया का ये आँचल

भूले से ग़र छूले कोई बुराई
फंदा गले का बनता ये आँचल
                                                      *************

शनिवार, अप्रैल 03, 2010

Bechara salesman

 कुछ लिखना चाह रही थी  समझ नहीं आ रहा था कि क्या लिखू क्योकि चारो तरफ कई दिन एक शोर मचा हुआ है और वो शोर है, सानिया मिर्जा कि शादी को लेकर, मिडिया  से लेकर फेसबुक तक और हिंदी चिटठा जगत से लेकर घर-घर तक चारो तरफ बस यही चर्चा है, खेर अब मैं यहाँ और शोर नहीं करुँगी ! लेकिन हाँ इस शोर के बीच मुझे एक और शोर सुनाई दिया दरअसल मेरे पास एक फोन आया, फोन टाटा इंडिकॉम से था वो सेल्समेन दरअसल एक फोन बेचना चाहता था कोई नया मोबाईल कनेक्शन  था, जिसकी खूबियों के बारे में वो मुझे बताने लगा हालांकि मैं उसे लगातार कह रही थी कि सर मुझे कोई नया कनेक्शन नहीं खरीदना लेकिन वो तो शायद अपना टार्गेट पूरा करने कि जल्दी में था इसलिए रिक्वेस्ट करने लगा कि "मैडम, प्लीज़ ले लीजिये काम आएगा" अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ हालाँकि मैं फोन डिस्कनेक्ट कर सकती थी लेकिन मुझे ऐसा करना उस वक़्त बदमिजाजी लगा, खेर मैंने उसे कहा कि "शाम शाम को ६ बजे फोन करना सोच कर बताउंगी" और ऐसा कह कर मैंने फोन रख दिया और अपने कामो में व्यस्त हो गई ! अब जैसा कि होना था वैसा ही हुआ उसका ठीक ६ बजे फोन आ गया (लेकिन मुझे इस बात कि उम्मीद नहीं थी ) और वो फिर से शुरू हो गया "मैडम, क्या सोचा आपने, आप फोन ले रही है" बेचारे ने इतनी उम्मीद से पूछा कि एक बार सोचा कि चलो ले लू लेकिन चूँकि   मुझे किसी नए कनेक्शन कि ज़रूरत थी नहीं इसलिए इस बार मैंने उसे बिलकुल साफ़ तौर पर कह दिया कि "सर, मुझे कोई फोन नहीं लेना और आप भी कृपया अब फोन रखे" लेकिन वो तो शायद कसम खा कर निकला था कि आज वो मुझे फोन बेच कर ही रहेगा अचानक बोला "मैडम, ले लीजिये"  तब मैंने बोला ठीक है सर ले तो लू पर इसका बिल कौन भरेगा" वो बोला "मैडम,  मैं भर दूंगा"  हे ?????......."सर, क्या बात है आपकी सेलरी बढ गई है क्या" मैंने पूछा, वो बोला "नहीं, मैडम, मुझे अपना टार्गेट पूरा करना है, बस ये आखिरी बचा है और आज ये मुझे बेचना है", इस बार उसकी आवाज़ में थोड़ी परेशानी थी मैंने कहा कि "सर, मुझे वाकई ये फोन नहीं लेना" और इस बार उसने "ठीक है" कह कर फोन रख दिया ! फोन रखते समय उसकी आवाज़ में परेशानी साफ़ झलक रही थी ! शायद उस पर अपना टार्गेट पूरा करने का बहुत दबाव था, लेकिन मैं भी क्या करती, इस बार के बजट ने मेरे ऊपर भी दबाव बना कर रखा था ! लेकिन बाद में जब बेठ कर सोचा तो लगा कि आज जहां हर तरफ नए-नए शोर मचे है वहाँ उस बेचारे को बस अपना टार्गेट पूरा करना है !  वैसे हम में से ऐसे कितने लोग है जो इन सेल्समेनो कि बात ध्यान से सुनते है शायद बहुत कम, मैं भी नहीं सुनती, आखिर कब तक सुने ये बोलते ही इतना है ! घर पर भी ना जाने कितने ही सेल्समेन रोज़ बेल बजाते है, किसी को सर्फ़ बेचना है, किसी तो तेल, किसी को शेम्पू, किसी को साबुन, किसी को वाटर प्यूरीफायर, किसी को चूहे मारने कि दवा, किसी को ना जाने क्या-क्या उफ़ !!!!!!!! सच बहुत परेशान करते है ये, कई  बार तो लोग इनकी सुने बिना ही इनके मुहँ पर दरवाज़ा बंद कर देते है, हाय, कैसा लगता होगा इन बेचारो को ! एक बार खुद को इनकी जगह रख कर देखा तो महसूस हुआ कि वास्तव में इनको कितना बुरा लगता होगा लेकिन वो ये किसी भी कस्टमर को महसूस नहीं  होने देते ! अब  इनके ऊपर अपने सिनिअर का इतना दबाव होता है कि उस दबाव में आकर ये बेचारे किसी कि बात का बुरा भी नहीं मानते फिर भले ही आप इन्हें गालिया ही क्यों ना दो ! लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि वो ऐसी नौकरी करते ही क्यों है???  तब मुझे अपने कॉलेज का एक वाकया याद आ गया ! मेरी एक दोस्त थी वो एक कॉल सेंटर में काम करती थी वो बताती थी कि अक्सर कई बार कस्टमर ऐसी भाषा का प्रयोग करते है कि अगर हमे अपनी नौकरी खो जाने का डर ना हो तो हम उन्हें उन्ही कि भाषा में जवाब दे दे ! लेकिन ऐसा हो नहीं सकता ! तब मैंने उससे पूछा था कि तू ऐसी  नौकरी कर ही क्यों  रही है, जवाब मिला " अभी मेरे पास इतनी डिग्री नहीं कि कोई और अच्छी नौकरी कर संकू और जब तक कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलती तब तक यही सही " ,"तो  मतलब तू ये नौकरी मजबूरी में कर रही है?" , तो उसने कहा "और नहीं तो क्या,  मज़बूरी ही तो है वरना कौन ये सेल्समेन कि नौकरी अपनी खुशी से करता है"  उसकी ये बात आज मुझे अचानक याद आ गई, और तब मुझे समझ आया कि उस बेचारे कि क्या  मजबूरी रही होगी,और उस पर कितना दबाव होगा  वरना वो मेरी इतनी सुनता ही क्यूँ ???
खेर,ये दबाव होता ही ऐसा है इस दबाव में आ कर लोग मज़बूरी में वो काम भी कर जाते है जो वो वास्तव में करना नहीं चाहते अब देखिये अभी-अभी खबर आई कि "आयशा सिद्दगी" के दबाव के चलते सानिया मिर्जा के परिवारवालों ने 'सानिया" और "शोहेब" का निकाह दुबई में करने का फैसला किया है !!!!!!! अब क्या बोलू फिर से ये शोर सुनाई देने लगा !!!!!!

रविवार, मार्च 28, 2010

jaago india ab to jaago
क्यों भई क्या हुआ "जागो इंडिया जागो" का स्लोगन याद आ गया ! आना ही चाहिए अब ये स्लोगन इतनी बार टीवी पर दिखाया जाता है की अब तो ये बच्चे बच्चे की जुबां पर चढ़ चुका है ! अब आप ये सोच रहे होंगे की मैं आपको ये स्लोगन क्यों याद दिला रही हूँ ! अरे भई बेचारे ये चाय ( TATA TEA) बेचने वाले अपनी चाय के साथ कितना कीमती स्लोगन बेच कर रहे है और एक हम है की मजाल हो इनकी सुने और सुने भी क्यों अब ये बेचने वाले तो ना जाने क्या क्या बेचते रहते है किस किस की सुनेंगे ???(पिछले दिनों खबर पड़ी की कोई फेसबुक पर भूत बेच रहा है, सोचा की चलो खरीद लू पर मम्मी की डांट का डर भूत के डर से ज्यादा था इसलिए नहीं खरीदे) लेकिन कभी कभी हमे इन बेचने वालो की सुन भी लेनी चाहिए आखिर ये यूही तो गला फाड़ नहीं रहे !
चलिए अब थोड़ी आसान भाषा मैं समझाती हूँ की आखिर मैं कहना क्या चाहती हूँ !
आज हम सभी सिस्टम को अनेको अनेक गालिया देते है और कारण सिस्टम में मौजूद "भ्रष्टाचार" जिसकी वजह से आज लगभग सभी ने सिस्टम को गालिया देने के मामले में पीएचडी की हुई है ! लेकिन यहाँ मेरा एक सवाल है की आखिर इस सिस्टम को ऐसा बनाया किसने ???
आज़ादी के बाद हमे जो देश मिला क्या वो ऐसा ही था ??? क्या हमारे देश का सिस्टम आज़ादी के काल से ही ऐसा है ??? जवाब होगा नहीं ! हमारा देश तो "सोने की चिड़िया" कहलाया करता था जिसके ज़र्रे ज़र्रे में खुशिया थी उस वक़्त देश का खजाना भरा हुआ था ! लेकिन धीरे धीरे हमारा खजाना खाली होता गया ये या तो लूट लिया गया या फिर कई नासमझ सत्ताधारियो की वजह से बदहाली की भेट चढ़ गया, और आज इसका आलम ये है की हमे किसी भी तरह के आयोजन के लिए भी रिजर्व बैंक से मिलने वाले क़र्ज़ का मुँह तांकना पड़ता है ! आखिर क्या वजह है इसकी की जब भी कोई सरकार सत्ता में आती है तो वो सबसे पहले यही कहती है की सरकारी खजाना खाली है और वो कुछ नहीं कर सकती इसलिए उसे तरह तरह के टैक्स वसूलने पद रहे जिससे की वो भारत पद चदा हुआ क़र्ज़ उतार सके ! वाह री सत्ता क्या हाल किया उस "चिड़िया" का जिससे लोग कभी कर्जे थे मांगते, आज वो खुद है हाथ फैलाए खड़ा !!!!
आज जो हमारे देश की हालत है, उसके पीछे क्या वास्तव में सिर्फ लालची सत्ता ही जिम्मेदार है ??? क्या इस देश की हालत के जिम्मेदार सिर्फ देश के वो नेता ही है जिन्होंने देश को लूटने में अंग्रेजो को भी कही पीछे छोड़ दिया है ??? क्या भ्रष्टाचार सिर्फ इन नेताओं की वजह से है ??? जवाब एक बार ध्यानपूर्वक सोच कर देखिये !!!
आज ये जागो इंडिया जागो का नारा अचानक तो नहीं लगा इसकी कोई तो वजह होगी ! आज जब हमे जब भी apna कोई kaam karwaana ho तो हम सबसे पहले क्या karte है dilli की bhasha में bole तो हम कोई jugaad dundte है किसी के admission से lekar naukri tak सब कुछ, bas एक jugaad से ho jaye यही तो हम chahte है फिर driving lisence से lekar IPL की ticket tak सब कुछ chahiye लेकिन bina कोई mehnat kare, aji samay kiske paas है aajkal
जब सब कुछ bus एक phone से sambhav ho तो क्या zaroorat की कोई driving test de या jaakar line में lage, तो क्या हुआ की हमारे इस khilaane के tarike से khane wala और khana sikh jaye , aji तो क्या हुआ की देश lagaatar इस bhrstachaar की gart में jata chla jaaye
हमे तो bus अपने kaam से matlab है और kaam ho jaane के बाद de denge हम भी इस सिस्टम को gaali, @#$!@ ये सिस्टम कभी नहीं sudhrega और kyu sudhre आखिर bigada भी तो हम ने ही है
लेकिन जब हम ise bigaad sakte है तो क्या ise sudharne का dam हम में नहीं है क्या हम इस सिस्टम को bachane के लिए कुछ नहीं कर sakte ???
आज kabir का likha एक doha yaad aa गया
"jyu til maahi tel है, jyu chakmak mah aag, tera saai tuj में jhak सके तो jhak"
तो जागो इंडिया जागो agar इस khaksaar की baato में zara भी dum होगा तो कोई तो zaroor jagega क्या होगा ऐसा ???????